दूसरों को समझने की सीख देती प्रेरणादायक हिंदी स्टोरी | inspirational hindi story on understand others with moral


गलती का एहसास प्रेरणादायक हिन्दी स्टोरी | Feeling Of Fault Hindi Story



  आज बैंक में मौजूद सभी स्टाफ में जिज्ञासा के भाव साफ झलक रहे हैं । आज यहां, बैंक के नए मैनेजर आने वाले है उन्हे देखने के लिए सारा स्टाफ उतावला हुए जा रहा हैं । थोड़ी ही देर में बैंक के सामने Hero Honda ss बाइक रूकती है । बाइक दिखने में तो काफी पुरानी है मगर पुरानी होने के बावजूद पूरी तरह मेंटेन है ।

  गाड़ी में से फ्रेंच कट दाढ़ी रखे हुए एक गोरा, गुड ड्रेसिंग सेंस वाला हैन्डसम युवक उतरता है । अंदर जाकर बैंक के स्टाफ को वह अपना परिचय देता है । सभी उसे देखकर काफी प्रभावित होते हैं । कई लोग फूलों का गुलदस्ता, तो कई लोग खाली हाथ ही उसे वेलकम करते हैं । वह दिखने में जितना स्मार्ट है । उससे कहीं ज्यादा वह मिलनसार स्वभाव का भी है ।

  थोड़ी ही देर में वह स्टाफ के सभी लोगों से ऐसे घुल मिल जाता है जैसे वह उन्हें बरसों से जानता हो, बैंक मैनेजर को जाँब मिलने के बाद यह उनकी  पहली जॉइनिंग है ऐसे बैंक मैनेजर अभी बिल्कुल नई उम्र मे हैं । मगर इतनी कम उम्र मे ही उन्होंने एक जानी-मानी संस्था से काफी बड़ी  बहुत ही डिग्री हासिल कर ली है । सभी से मिलने के बाद वह अपने चेंबर में चले जाते हैं ।

  अगले दिन मैनेजर साहब सभी स्टाफ की मीटिंग लेते हैं और उन्हें एक सरकारी बैंक वालों के जैसा ढुलमुल रवैया त्याग कर स्मार्ट वर्क करने का सुझाव देते हैं साथ ही वे उन्हें प्रजेंटेबल दिखने के लिए भी कहते हैं । सभी बैंक मैनेजर की हां में हां मिलाते हैं ।

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  आखिर में मैनेजर साहब सभी को अगले दिन से साढे दस बजे की बजाय सुबह सवा नौ बजे ही बैंक आ जाने की सख्त हिदायत देते हैं । सभी चेहरे पर मुस्कान लिए यस सर यस सर करते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल जाते हैं । मगर जैसे ही वे बाहर आते हैं । उनके चेहरे के रंग और उनकी जुबान दोनों ही बदल जाती है ।
  सभी आपस में खुसुर-फसुर शुरू कर देते हैं । तभी उनमें से एक कहता है कि

 "अरे भाई बड़े डिग्री लेकर आए हैं तो कुछ दिन रौब तो दिखाएंगे ही" 
  तभी उनमे से दूसरा कहता है 

   

   "हां भाई इन नए-नए लड़कों में जोश ज्यादा और होश कम होता है । तुम देखना कुछ ही दिनों में इन्हें समझ में आ जाएगा कि सरकारी आफिसो में गाड़ी चलती नहीं बल्कि ढकेली जाती है ।" 

  
  उनकी आपस मे ये सारी बातें चल ही रहीं थी कि तभी बैंक मैनेजर बाहर आ जाते हैं । वे देखते हैं कि एक तरफ बैंक में आए ग्राहकों का ताता लगा हुआ है और दूसरी तरफ सारा स्टाफ एक जगह गोलबंद होकर बस बातें करने में व्यस्त है । वे उन्हे अभी कुछ कहते की तभी उनके सामने मौजूद होने का आभास पाकर सारा स्टाफ अपने-अपने काम में फौरन लग जाता हैं ।

  धीरे-धीरे बैंक मैनेजर का बैंक में महीना पूरा होने को है मगर उनका बेहतर अनुशासन और ग्राहको को बेहतर सुविधा मुहैया कराने का प्रयास निरन्तर  जारी है । जिसके कारण उनके स्टाफ में उनके प्रति  नाराजगी बढ़ती चली जा रही है । अब तो सभी के सभी  बैंक मैनेजर को अपने सामने देखना भी नहीं चाहते थे । कुछ तो आड़े-तिरछे उन्हें कुछ न कुछ सुना भी जाते हैं  हालांकि बैंक मैनेजर उनकी ऐसी बातों को सुनकर भी अनसुना कर देते हैं मानो उन्होंने कुछ सुना ही नाराज हो वे कभी किसी को बुरा नहीं कहते वे आज भी हर किसी से बहुत प्रेम से मिलते हैं ।

  असल में बैंक मैनेजर अपने सरकारी बैंक को प्राइवेट बैंकों की तरह ही बेहतर ग्राहक सुविधाएं देने वाला बैंक बनाना चाहते हैं जिसके लिए वे सारे रूल रेगुलेशन बिल्कुल वैसा ही लगाना चाहते हैं जैसा प्राइवेट बैंक में अक्सर देखा जाता है ।

  वे बखूबी जानते हैं  कि 20 वर्षों से इन बैंक कर्मियों के दिमाग मे, सरकारी तौर तरीके की जंग जो लग चुकी है उन्हे छुड़ा पाना इतना आसान नहीं है । ऐसे में वह निरंतर उनकी बातों को इग्नोर कर के  उन्हें किसी तरह से पटरी पर लाने का प्रयास करते रहते हैं ।

  उनके आने से पहले जो बैंक साढे दस बजे तक खुलता और फिर 4 बजते-बजते शटर गिर जाता था आज उसी बैंक के बैंक कर्मी 9 बजते-बजते बैंक मे आ जाते हैं और फिर 6-7 बजे तक जाते हैं । कभी-कभी तो उन्हें काम पूरा करते करते 9-10 भी बज जाते हैं ।

 उनके आने से क्षेत्र के लोगों में अपार हर्ष है बैंक में ग्राहकों मे नए खाते खुलवाने वालों की संख्या मे दिनो दिन बढौत्री होती जा रही है । जिससे स्टाफ पर फालतू के काम का बोझ और बढती जा रहा है जिसके जिम्मेदार है नए मैनेजर ।अच्छी भली आराम तलब नौकरी को जहन्नुम बना कर रख दिया है इन नए नवेले साहब ने।

  संजोग से एक दिन एक सीनियर ऑफिसर का बैंक में आना हुआ वैसे तो वह ऑफिसर बैंक अक्सर आया करता था परंतु इस बार बैंक में कदम रखते ही उन्हें लगा जैसे वह कहीं दूसरी जगह आ गए । बैंक में साफ-सफाई उच्च स्तर की थी । बैंक में खाता खुलवाने वालों की भारी भीड़ लगी हुई थी । दूसरी तरफ सारे कर्मचारी वेल मेंटेन होकर अपने अपने कार्यों में लगे थे । वह ग्राहकों के साथ ऐसे पेश आ रहे थे जैसे मानो किसी प्राइवेट बैंक में अक्सर देखा जाता है । सीनियर सिटीजन को तो वे चाय-पानी भी पूछ रहे थे । वाकई यह आश्चर्यजनक था । वही मैनेजर ग्राहकों से सीधे संवाद स्थापित करने में लगे थे ।

  ऑफिसर यह सब देख के हतप्रभ थे । उनकी मैनेजर के साथ काफी देर तक मीटिंग चलती रही ।  मैनेजर कि इस प्रकार के कार्यों से वे बहुत खुश है । कुछ देर बाद मैनेजर जब दूसरे कार्यों में थोड़ा व्यस्त हो गए तब ऑफिसर को अकेला पाकर एक के बाद एक स्टाफ आ आकर उनसे मैनेजर के सख्त रवैया की पुरजोर शिकायत करने लगेंगे उन्होंने आफिसर को बैंक समय से काफी पहले आना और फिर देर से जाना और मैनेजर द्वारा बनाए गए तमाम नए-नए  नियम के बारे मे बताया जिन्हे फॉलो करना उन्हे काफी मुश्किल हो रहा था । कुछ बैंक कर्मियों ने तो आफिसर से उनका ट्रांसफर किसी जिले के किसी दूसरे ब्रान्च मे करने की शिफारिश भी की ।
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  चूंकि ऑफिसर को भी काफी दिनों से सरकारी रोटियां तोड़ने की आदत हो चुकी थी । ऐसे मे उन्हें भी उनकी बातें बहुत सहज ही समझ आ गई । उन्हें लगा कि बैंक मैनेजर जवानी के जोश मे, स्टाफ पर कुछ ज्यादा ही ज्यादती कर रहा हैं । ऐसे में आफिसर ने बैंक मैनेजर को अपने पास बुलाया और कहा  

  "देखो मैनेजर तुमने बहुत ही ऊंची संस्था से एमबीए की डिग्री हासिल की है और तुम युवा भी हो ऐसे मे तुम्हारे अंदर का जवान खून दहाड़ मार रहा है । मगर हमने धूप में बाल सफेद नहीं किए । तुम्हारे जैसे कई लड़के मेरे सामने आए और गए । शुरू शुरू में सब बहुत एडवांस बनने की कोशिश करते हैं । मगर धीरे-धीरे सब रास्ते पर आ जाते हैं । तुम्हारा काम अच्छा है मगर तुम कुछ ज्यादा ही रूल्स बना रहे हो जिन्हें फॉलो कर पाना यहां के कर्मचारियों को लगभग नामुमकिन सा हो है । बेहतर होगा कि तुम अपने रूल्स में थोड़ा लचीलापन लाओ । वरना ऐसा न हो कि तुम्हे जल्दी ही यहां से रुखसत होना पड़े । ऐसा मैं नहीं कह रहा बल्कि यहां बैंक के सभी स्टाफ की, तुम्हारे प्रति जो नाराजगी है और जो राय बन रही है , उसको देख कर मैं कह रहा हूँ"

  
  तब मैनेजर ने उन्हें विश्वास दिलाया कि ज्यादा दिन  बैंक कर्मचारियों की नाराजगी नहीं रहेगी । जल्द ही मेरी बातों को वे समझ लेंगे और सब कुछ ठीक हो जाएगा ।

 
अचानक एक दिन बैंक मैनेजर खुद सवा ग्यारह बजे बैंक पहुंचते है यह देख कर उनका स्टाफ चुटकी लेता है और उनसे कहता है

  "क्या साहब आज खाना बनाने की ड्यूटी भाभी जी ने आपको ही दे ढाली क्या जिसके कारण आपको आने में इतनी देर हो गई"

  अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि सारा स्टाफ जोर-जोर से ठहाके मारकर बैंक मैनेजर पर हंसने लगा । बैंक मैनेजर स्टाफ के दर्द से भलीभांति वाकिफ थे, वे जानते थे कि बैंक के उस स्टाफ के कहने का आशय क्या है मगर फिर भी बैंक मैनेजर ने अपनी सरलता को दिखाते हुए पहले तो थोड़ा मुस्कुराया और फिर कहा 

  "नहीं नहीं सिंह साहब सिर्फ खाना पकाना होता तो बात ही क्या थी वो तो मेरा रोज का काम है असल में आज उसने खाना पकाने के साथ-साथ ही बर्तन पोछे का काम भी मुझे दे दिया । इसीलिए थोड़ा आने में वक्त लग गया"

  
  इतनी ऊंची पोस्ट पर आसीन और इतनी बड़ी डिग्री वाले के मुख से इतने सरलता भरे जवाब को सुनकर सिंह साहब थोड़ा शर्मा गए । उनकी बातों का जवाब देने के बाद बैंक मैनेजर अपने काम में चले गए ।

  मगर इस दिन के बाद से मैनेजर साहब के बैंक लेट आने का सिलसिला लगातार जारी रहा । वे अब कभी भी समय से बैंक नहीं पहुंच पाते, वे अब हमेशा, बैंक 1-2 घंटे लेट से ही पहुंचते । बात सिर्फ लेट पहुंचने तक ही होती तो बैंक वाले शायद अपनी हद न भूलते । मगर यहां तो मैनेजर साहब की अपना सारा तौर-तरीका ही बदल लिया था ।

  अब ड्रेसिंग सेंस तो दूर की बात थी । उनकी शर्ट भी आधी इन और आधी आउट रहा करती । बाल भी बिखरे-बिखरे से रहते । जूतों को देखकर ऐसा लगता मानो उन्हे पॉलिश किए जमाना बीत गया हो । अब ये हाल हो चुका था साहब का वह भी केवल दो महीने की नौकरी मे ।

  अपने इस बैंक को एक प्राइवेट बैंक जैसा लुक देने का सपना छोड़ वे अब खुद ही सरकारी रंग-ढंग में पूरी तरह ढल चुके थे ।

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  सिस्टम सुधारने निकले साहब को सिस्टम ने खुद ही सुधार दिया था ।

  खुद कीचड़ मे गिरा हुआ इन्सान दूसरो को सही रास्तों पर चलने की सीख भला कैसे दे सकता है ? ऐसे में साहब की बातों और उनके बनाए गए रूल-रेगूलेशन्स का असर बैंक कर्मियों के उपर से धीरे-धीरे कम होने लगा और वे फिर अपने उसी पुराने ढर्रे पर आ गए ।

  बैंक ने एकबार फिर अपनी खोई सरकारी इमेज प्राप्त कर ली थी यहां कुछ नया था तो कुछ मैनेजर साहब की खिल्ली उड़ाने का तरीका, अब तो जिसे देखो वही मैनेजर साहब को उनके पुराने दिनों की याद दिला कर ठहाके लगाता और उनका मजाक उड़ाता था ।
  
  एक दिन अचानक सुबह-सुबह ही बैंक के आला अफसर बैंक में आ धमके संजोग से आज बैंक के लगभग सभी कर्मचारी मौजूद थे सिर्फ बैंक मैनेजर को छोड़कर । अफसरो ने यहां अपने सारे काम निपटाने के बाद बैंक मैनेजर की राह देखने लगे । बैंक मैनेजर तकरीबन साढे बारह बजे बैंक पहुंचे । 

  मैनेजर साहब के अंदर दाखिल होते ही उनके सीनियर ऑफिसर ने मैनेजर को सुनाते हुए, अपने साथ आए आफिसर से बड़े ही तीखे अंदाज में कहा 

  "आज कल के लड़कों का यही हाल है शुरु-शुरु में तो वे बहुत जोश दिखाते हैं मालूम पड़ता है कि जैसे अभी कुछ ही दिनों में वे सबकुछ बदल कर रख देंगे । मगर थोड़े ही दिनों में इनका सारा जोश ठंडा पड़ जाता है । अब अपने मैनेजर साहब को ही देख लीजिए ।  कुछ ही महीनों पहले जब ये यहां अपनी पहली जॉइनिंग लिए थे । तब तो इन्होंने सारे बैंक वालों को सवा नौ बजे तक बैंक आ जाने की सख्त हिदायत दे रखी थी । आने मे थोड़ी से देर हो जाने पर उन्हें इनके क्रोध का सामना करना पड़ता था... .प्रजेंटेबल दिखो ऐसे करो वगैरह वगैरह.. . मगर आज इनके खुद का हाल देखो, क्या किसी एंगल से ये बैंक कर्मी लगते हैं क्या ? मालूम पड़ता है मानो किसी गल्ले की दुकान पर बोरे ढोने का काम करते हों और जरा इनके आने का समय देखो .. . बैंक खुले तकरीबन 2 घंटे हो गए । मगर मैनेजर साहब को अब यहां आने की फुर्सत मिली है"
  
  मैनेजर के पास अपने सीनियर की बातों का कोई जवाब नहीं था । उनकी जुबान पर खामोशी के ताले लटक रहे थे । वे सर झुकाए कभी कॉलर की बटन बंद करते तो कभी धीरे से बाहर निकली शर्ट को अंदर करने की कोशिश करते हैं तो कभी  अपने एक टांग को दूसरी टांग के पीछे ले जाकर अपने जूतों को पैरों में रगड़ कर उसे थोड़ा चमकाने की कोशिश करते । 

  आला अधिकारियों ने उन्हें अपने अंदर सुधार लाने की हिदायत देते हुए वहां से रूकसत हो लिए । उनके चले जाने के बाद अपने चेंबर में बैठे बैंक मैनेजर के चेहरे को देख देखकर सभी मुस्कुराने लगे । आपस में उनकी खुशर-खुशर फिर शुरू हो गई ।

  परंतु आला अफसरों के समझाने के बावजूद बैंक मैनेजर के रवैये मे एक पैसे का सुधार नही आया उल्टे सुधार होने की बजाय दिन प्रतिदिन और वे और ज्यादा ढिले होते चले गए । अब तो कई-कई दिनों तक वे बैंक ही नहीं आते ।  जिसके कारण उन्हें कई बार बड़े अधिकारियों के सामने शर्मिंदा होना पड़ा । 

  एक दिन बैंक मैनेजर जब दूसरे स्टाफ के साथ काम कर रहे थे । तभी अचानक उनके मुख से जोर-जोर की खून की उल्टियां होने लगी और वे अचानक लगभग बेहोशी की हालत मे पहुंच गए ।  उनकी ऐसी हालत देख बैंक कर्मियों ने पास के अस्पताल से डॉक्टर को बुलाया तभी किसी ने उनकी बिगड़ी हालत की सूचना उनके परिवार वालों को दी, सूचना पाते ही भागे-भागे उनकी बीबी गोद मे दो माह के बेटे को लिए, बूढ़े सास-ससुर के साथ वहां पहुची ।

  वहां पहले से मौजूद डॉक्टर बैंक मैनेजर का इलाज कर रहा था । डॉक्टर के पूछने पर मैने की बीबी ने अपने पति के बारे में कुछ ऐसी बातें बताई जिसे सुनकर वहां मौजूद बैंक कर्मचारियों के चेहरे शर्म से झुक गए । सबके चेहरे पर पछतावा साफ झलक रहा था ।

  असल में बैंक मैनेजर को कुछ महीने पहले ही पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है और अब उनके पास ज्यादा समय नही बचा । जब यह बात उनके घर वालों को पता लगी तब उन्होंने उन्हें बैंक आने से मना करना चाहा, मगर बैंक मैनेजर खुद को मिली जिम्मेदारियों को, जब तक संभव हो तब तक निभाना चाहते थे । ऐसे में उन्होंने बैंक जाना बंद नहीं किया । वहीं उनके परिवार वालों का उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की इच्छा दिन-ब-दिन बढती गई जो शायद जायज भी थी और जिसे बैंक मैनेजर किसी भी हाल में इग्नोर नहीं कर सकते थे । ऐसे में पहले जहां वह अपने परिवार को बमुश्किल एक-दो घंटे ही दे पाते थे । वही अब वे उन्हें थोड़ा ज्यादा समय देने लगे थे ।  परिवार को थोड़ा ज्यादा समय देने के कारण वे बैंक अक्सर थोड़ा लेट पहुंचते थे । मगर बैंक का कार्य फिर भी वह हर हाल में पूरा करके ही घर लौटते थे । इस बीमारी में घर खर्च चलाना ही काफी मुश्किल हो रहा था । ऐसे में खुद को मेंटेन रख पाना उनके बस की बात नहीं थी । जिसके कारण अब उनका लुक पहले से काफी बदल गया था।

   बैंक मैनेजर के ऐसे जिम्मेदारी भरे कार्यो को देखकर बैंक के सभी कर्मचारियों को अपने आप में काफी लज्जा महसूस होने लगी । उन्हें बैंक मैनेजर कसे गए तंज पर अब पछतावा हो रहा था । 

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है | Moral Of This Inspirational Hindi Story


किसी भी शख्स को भली-भांति जाने बगैर उसके बारे में कोई राय बना लेना अक्सर गलत साबित होता है !


  हम अक्सर दूसरों के खराब हाल को देखकर उस पर तंज कसते हैं वह ऐसा क्यों है ? उसने कपड़े फटे क्यों नहीं पहने हैं ? उसके पास वे सुविधाए क्यों नहीं है जो एक आम आदमी के पास होनी ही चाहिए ? उसका बच्चा स्कूल पढ़ने क्यों नहीं जाता ? वह पढ़ने में इतना कंजूस क्यों है ? उसने आगे की पढ़ाई क्यों नहीं की ? उसके पास एक अच्छी जॉब क्यों नहीं है ?

  ऐसे तमाम सवाल हम अगले से या तो सीधे तौर पर या आड़े तीरक्षे करने लगते हैं । । हम कभी उसकी मजबूरियों को समझने की कोशिश नहीं करते । अगला अगर खुद से अपनी परेशानियों को नहीं बताता तो हम उसे निकम्मा, बेवकूफ, नाकाबिल समझ बैठते हैं और इधर-उधर उसके बारे में बुराइयां करने लगते हैं । जबकि उसको हमारे Support की, हमारे Care  की सबसे ज्यादा जरूरत होती है परंतु हम उसकी Problems को जाने बगैर, उल्टे उसके दुश्मन बन बैठते हैं और हमारा कार्य सिर्फ और सिर्फ उसकी आलोचना करने तक रह जाता है । 
  इस Hindi Story में हमने देखा कि किस प्रकार Bank Manager ने आते ही बैंक के कामकाज को सुधारने का प्रयास किया । हां मगर यह जरूर है कि उसने जो सोचा था वह नही हो सका उसकी जिंदगी में आए तूफान ने उसके सारे Dreams पर पानी फेर दिया । मगर फिर भी वह जहां तक संभव था अपनी हर Responsibility को पूरा करने में तन-मन से लगा रहा । मगर उसको समझने वाला वहां कोई नहीं था सब ने यह मान लिया कि जवान खून का जोश अब ठंडा हो चुका है । मगर सच तो कुछ और ही था ।
  हमें किसी के Present को देखकर, कुछ भी React करने से पहले पहले उसको समझने की कोशिश करनी होगी । किसी को राय देने से पहले जरा ये जानने की कोशिश करें कि आप जो राय उसे देने की सोच रहे है कहीं वह उससे भी कही ज्यादा बेहतर करने का प्रयास पहले से ही तो नही कर रहा, कहीं वह, वो तो नहीं कर रहा जो करने की आप शायद सपने में भी नहीं सोच सकते । ऐसे में बेहतर होगा कि बिना अगले को समझे उसकी आलोचना से बचे ।
     

   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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