11 November, 2017

पद्चिन्ह | Footprint Inspirational Story In Hindi



     दिव्या नगर के राजा के चार पुत्र थे। उनके चारों पुत्रों में तीन पुत्र सभी विद्याओं में निपुण थे। उनके कौशल का गुणगान पूरे दिव्य नगर सम्राज्य के साथ-साथ पड़ोसी राज्य में था।
    उनके प्रभाव के कारण ही कोई भी शत्रु राज्य पर हमला करने से कतराते थे। राजा भी अपने पुत्रों के गुणों के कारण उन्हें बहुत मानते।
     वही राजा का चौथा पुत्र अत्यंत सामान्य गुणो वाला व्यक्ति था वो ना तीनों भाइयों की तरह बुद्धिमान था। और ना ही किसी विद्या में पारंगत।
     इसलिए कभी भी उसे युद्धभूमि में कोई साथ लेकर नहीं जाता था। 
    राजा उसे कोई महत्व नहीं देते, जब कि रानी चारों पुत्रों को समान रुप से मानती वो उन में किसी प्रकार का कोई भेद नहीं करती।
     कुछ समय बाद न जाने क्यो, सारा राज्य सूखे की चपेट में आने लगा। राज्य कि हालत दिन प्रतिदिन खराब होने लगी। लोग भूख से मरने लगे। अंततः इस स्थिति से निपटने के लिए राजा ने एक यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ में दुनिया भर से साधु महात्माओं को आमंत्रित किया गया। यज्ञ के संपन्न होने के बाद एक साधु ने राजा को अपने पास बुलाया और उसे एक बीज दिया। और कहा 
    हे राजन इस बीज को तुम आज ही बो दो। और इसकी हमेशा सेवा करना। जब इसमें से पौधा निकलेगा और वह जैसे-जैसे बढ़ेगा तुम्हारा राज्य और तुम्हारा यश  वैसे वैसे-वैसे ही बढ़ता जाएगा पर ध्यान रहे कि उस पौधे को कभी कोई हानि न पहुंचे
     राजा ने वैसा ही किया जैसा महात्मा ने बताया था देखते ही देखते राजा पुनः धन धान्य से संपन्न हो गया। चारों तरफ खुशहाली फैल गई। अब राजा स्वयं उस पौधे की देखभाल करते वे सुबह उठने के बाद सबसे पहले उस पौधे को देखते उस पौधे में राजा की मानो प्राण बस गए हो।
     जहां पौधा लगाया गया था। वहां सिर्फ राजा के परिवार के लोगों को ही जाने की अनुमति थी। पौधे की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्वयं सेनापति ने संभाल रखी थी। उन्हें भी पौधे के पास जाने की आज्ञा नहीं थी। 
    एक दिन जब राजा सुबह उठकर पौधे को देखने पहुंचे तो पौधा वहां था ही नहीं। राजा बेहोश होकर गिर पड़े। सूचना पाकर राजा का पूरा परिवार व अन्य वहा पहुंच गए। अब सवाल था कि उस पौधे को किसने नष्ट किया। 
     हर विद्या में महारत हासिल कर रखे राजा के तीनों पुत्र स्वयं इस बात को समझने में लग गए।
     आखिरकार वहां किसी के जूतों के निशान प्राप्त हुए। वो निशान किसी और के नहीं बल्कि स्वयं सेनापति के जूतों के से मिलते जुलते निशान थे। ऐसे में सेनापति शक के घेरे में आ गए। राजा को यह जानकर बड़ा गुस्सा आया मगर तभी चौथे बेटे ने सेनापति को बेकसूर होने व घटना मे किसी और के दोषी होने की संभावना जताई। वो कुछ और कहता कि राजा ने उसे मूर्ख, अज्ञानी, नकारा कहकर चुप करा दिया, और सेनापति का सिर कलम करने की बात कही मगर सेनापति ने अपने पुराने वफादारी की बात याद दिलाई। राजा ने उसकी एक नहीं सुनी तब रानी ने, राजा से चौथे बेटे की बात को भी एक बार सुनने का आग्रह किया। राजा ने बड़े दबे स्वरो से चौथे बेटे से अपनी बात रखने को कहा उसने बताया कि यह सच है, कि जूतों के निशान सेनापति के हैं मगर सेनापति पूरी तरह स्वस्थ और शरीर से मजबूत है जबकि ध्यान से देखने पर एक बात स्पष्ट हो जाती है कि पैरो के निशान किसी ऐसे व्यक्ति के हैं जिसके एक पैर का वजन उसके दूसरे पैर के वजन से ज्यादा है।  क्योंकि उस व्यक्ति के एक पैर की छाप दूसरे पैर की छाप से ज्यादा गहरा है। अर्थात ये पैरों के निशान किसी ऐसे व्यक्ति के हैं जो या तो लंगड़ा है अथवा गर्भवती है चूंकि यहां आने की इजाजत सिर्फ हमारे परिवार के गिने चुने सदस्यों और सेनापति को है और इनमे से कोई भी लंगड़ा नहीं है। इसलिए वो शख्स गर्भवती है अर्थात वो मेरी-----
     ऐसे कहते कहते चौथे बेटे की जुबान लड़खड़ा गई।
 राजा समझ गए वो शख्स कोई और नहीं बल्कि राजा की दूसरी पत्नी थी, जोकि गर्भवती थी । जिसने अपनी कोख से एक मात्र राजा के इस चौथे पुत्र को जन्म दिया था। और राजा के द्वारा अपने पुत्र के तिरस्कार और बाकी तीन पुत्रों के प्रति आदर सम्मान से क्षुब्ध थी।

             Moral of the story :-

      हम खुद की समझ को सर्वश्रेष्ठ मानकर अक्सर दूसरों के सुझावों विचारों को अनदेखा करते हैं। जबकि  कभी-कभी उनके सुझाव और विचार भी बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। इसलिए हमें दूसरों के विचारों को भी जरुर  जानना चाहिए।

  Writer -   Karan "GirijaNandan" 

             
loading...
MyNiceLine. com
MyNiceLine. com

MyNiceLine.com शायरी, कविता, प्रेरणादायक कहानीयों, जीवनी, प्रेरणादायक विचारों, मेक मनी एवं स्वास्थ्य से सम्बंधित वेबसाइट है । जिसका मकसद इन्हें ऐसे लोगों तक ऑनलाइन उपलब्ध कराना है जो इससे गहरा लगाव रखते हैं !!

Follow Us On Social Media

About Us | Contact Us | Privacy Policy | Subscribe Now | Submit Your Post