14 May, 2018

एकता में बल है | Power Of Unity Motivational Story In Hindi

एकता की शक्ति - प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Ekta  Mein Bal Hai - Motivational Story In Hindi With Moral 


"एकता मे बल है" कहावत पर प्रेरणादायक हिन्दी स्टोरी | motivational story in hindi on power of unity with moral.

  जंगल का राजा शेर जिससे जंगल के सभी जानवर डरते हैं जिसके सामने कोई भी जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता वह शेर यूं ही जंगल का राजा नहीं कहलाता उसके पास दूसरे जानवरों पर राज करने की पर्याप्त क्षमता भी होती हैं । ऐसा ही एक शेर एक विशालकाय जंगल के एक छोर पर रहा करता था ।
   उसी जंगल में बहुत सारे जानवर निवास करते थे । शेर अभी काफी जवान, ताकतवर और फुर्तीला था । ऐसे में कोई भी शिकार उससे बचकर नहीं जा पाता । वह रोज  किसी न किसी जानवर को अपना शिकार अवश्य बनाता । जिसके कारण जंगल के सारे जानवर उससे काफी भयभीत रहा करते ।
  उनके मन में हमेशा मृत्यु का भय बना रहता था । जंगल में जानवरों की घटती संख्या से चिंतित सभी जानवरों ने एक दिन इस समस्या से निपटने के लिए आपस में एक बैठक की जंगल के सभी जानवर वहां उपस्थित हुए । काफी देर तक उन सभी में सलाह मशवरा चलता रहा ।
  सभी जानवर अपनी ओर से इस मुश्किल से निजात पाने का उपाय सुझाते रहे । चल रहे इस मंथन के बीच ही किसी ने सुझाव दिया कि सभी जानवर बारी बारी से प्रत्येक  दिन  जंगल के चारों तरफ पहरा देंगे और शेर के आने पर दूसरे जानवरों को एक विशेष संकेत देंगे ।
  जिससे बाकी सभी जानवरों भी शेर से सचेत हो जाए और शेर से सभी अपने प्राणो की रक्षा कर सके । सभी जानवरो को यह योजना काफी पसंद आई । सभी जानवर  तैयार हो गए । अगले ही दिन से कुछ जानवर जंगल में पहरा देने लगे ।
  दोपहर बाद शेर ने शिकार के लिए जंगल में प्रवेश किया काफी अंदर आने के बाद शेर को जानवर की गंध का एहसास हुआ । जब तक वो कुछ सोच पाता उससे पहले ही, पहले से तैनात जानवरों ने शेर की आहट पहचान कर अन्य जानवरों को संकेत देते हुए वहां से भाग निकले ।
  शेर ने काफी कोशिश की परंतु वह असफल रहा । इस तरह से शेर का एक दिन बेकार चला गया । अगले दिन शेर ने पुनः कोशिश की परंतु उसे पुनः असफलता हाथ लगी । देखते ही देखते कई प्रयासों के बावजूद उसे शिकार प्राप्त करने में सफलता प्राप्त नहीं हो सकी ।
  शेर नही जान पा रहा था कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा था । कई दिनो के कार्य में असफल शेर भूख से बेहाल हो गया । उसे अब शिकार की जबरदस्त आवश्यकता थी क्योंकि अब तो जान पर बन आयी थी ।
  इतने दिनों की असफलता में शेर ने यह भाप लिया था कि हो न हो उसकी असफलता का कारण सारे जानवरों की चतुराई भरी योजना है । अगले दिन शेर चुपचाप नदी के पास बैठा रहा आज वह शिकार के लिए गया ही नहीं ।
  वहीं दूसरी तरफ सारे जानवर शेर  के आने के रास्ते पर मुस्तैदी से नजरें गड़ाए उसका इन्तजार कर रहे थो परंतु सुबह से दोपहर और दोपहर  से  शाम हो गई परंतु शेर नहीं आया ।

  जब आधी रात हो गई तब शेर चुपके चुपके कदमों को दबाए हुए जंगल की तरफ बढ़ा चूंकि शेर पहले कभी रात को शिकार के लिए वहाँ नहीं आया था । इसलिए सारे जानवर रात को निश्चिंत होकर सो रहे थे ।


  जंगल के बीचो-बीच आने के बाद थोड़ी ही दूर पर एक लोमड़ी शेर को दिखाई दी । शेर कोई जल्दबाजी न दिखाते हुए बड़े ही आराम से उसके पास पहुंच गया परंतु तबतक लोमडी को किसी के करीब होने का एहसास हो गया ।

   लोमड़ी ने पीछे पलट कर न देखते हुए दूसरे जानवरों को संकेत देते हुए काफी जोर से भागा । नजारा कुछ ऐसा था लोमड़ी आगे आगे और शेर पीछे पीछे । एक भागे जा रहा था तो दूसरा दौड़ाए जा रहा । उधर जंगल के बाकी जानवर भी शेर को आया हुआ जानकर अपनी अपनी जगह दुबक गए ।


  काफी दौड़ लगाने के बाद शेर लोमड़ी के पास जा पहुंचा और आखिरकार उसने उसे अपना शिकार बना ढाला । काफी दिनों बाद जाकर शेर को शिकार प्राप्त करने में सफलता प्राप्त हुई थी । बहुत दिनों की तड़प आज जाकर शान्त हुई थी । शेर की इस जीत से और उसके इस नई चाल से सभी जानवर चकित और काफी भयभीत थे । भय के बादल उनके सर पर एक बार फिर से मडराने लगे थे ।
  ऐसे में सभी जानवरों ने एक बार फिर से मीटिंग बुलाई । इस बार यह तय हुआ कि दिन के साथ-साथ अब रात में भी चौकस रहने की जरूरत है इसलिए अब शेर की पहरेदारी दिन के साथ-साथ रात में भी की जाने लगी । उधर काफी बड़ा शिकार प्राप्त करने के बाद शेर आराम फरमा रहा था ।
  काफी दिनों के बाद उसने अपनी भूख पर शांति पाई थी ।  कुछ दिन बाद शेर को पुनः शिकार की तलब हुई । नई योजना में कामयाब शेर ने पुनः इस नई योजना के तहत ही शिकार करने की सोची, यानी उसने अब दिन की बजाय रात में ही अपना काम निपटाने को ज्यादा बेहतर समझा क्योंकि कई दिनों तक दिन में शिकार करने में असफल प्राप्त करने वाले शेर ने रात के अपने पहले ही शिकार में सफलता प्राप्त की थी अतः उसने अगले दिन पिछली बार की तरह ही दिन ढलने के बाद शाम को दूर दूर से ही जंगल का जायजा लेता रहा ।
  आधी रात गुजर जाने के बाद शेर ने एक बार फिर रात के सन्नाटे में अपने पैरों को दबाए हुए बिना कोई शोर किए जंगल के अंदर चुपचाप अपने शिकार की ओर बढ़ चला । काफी दूर जाने के बाद उसकी आंखों में  उम्मीद की एक नई किरण चमक उठी । उसने अपने सामने एक खूबसूरत हिरण को देखा । 

  शेर को हिरण का मांस काफी पसंद था । अपने स्वादिष्ट शिकार को सामने देखकर उसकी जीभ लपलपा ने लगी । मगर धीरज दिखाते हुए वह चुपचाप धीरे धीरे शिकार की तरफ आगे बढ़ा ।  जब तक हिरण को शेर के वहां होने का आभास होता ।


  तब तक काफी देर हो चुकी थी जैसे ही हिरण को शेर के वहाँ मौजूदगी की खबर लगी वह उल्टे पांव वहां से भाग निकला ।  नजारा एक बार फिर पहले जैसा ही था शिकार आगे-आगे शिकारी पीछे पीछे बस फर्क इतना था कि इस बार लोमड़ी की जगह हिरण की बारी थी ।
  हिरण ने खुद को बचाने के लिए काफी जोर लगाया । काफी दूर भागने के बाद अचानक शेर हिरण के ठीक सामने आकर खड़ा हुआ । यह मंजर देख हिरण के रोंगटे खड़े हो गए । वह समझ चुका था कि आज उसके जीवन का आखिरी दिन निश्चित है ।

  वह काफी डर गया । वह क्या करे, उसे कुछ समझ में भी नहीं आ रहा था शेर मौका न गवाते हुए अगले ही पल हिरण पर टूट पड़ा । हिरण की आवाज भी नहीं निकल पा रही थी । तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने शेर और हिरन दोनों को चौंका दिया ।


  शेर ने अपने ऊपर किसी दूसरे जानवर को हमला करते हुए पाया । वह जैसे ही उस पर  झपट्टा उसके सामने जो दृश्य था उसे देख कर वह और भी चकित रह गया । उसने देखा कि उसपर हमला करने वाला एक लोमड़ी था और इतना ही नही उसके अलावा वहां और भी कई लोमड़ियों सहित ढेरो जानवरों वहां उपस्थित थे उन सबने उसे घेर रखा है । शेर मन-ही-मन बहुत खुश हुआ क्योंकि अभी कुछ दिनों पहले ही उसने बनवास झेला था उसकी मरने तक की नौबत आ गई थी ।
  परंतु आज तो दिवाली मनाने का अवसर उसे प्राप्त होने वाला था । जिन शिकारों के लिए उसने काफी कोशिशें कि और ढेर सारा दिमाग लगाया था । आज  सारे शिकार खुद ही उसका शिकार बनने उसके पास जा पहुंचे थे । अभी वह कुछ करता की तब तक सारे जानवर उस पर टूट पड़े ।
  कुछ देर तक तो वह उन से लड़ता रहा पर जानवर उस पर धीरे धीरे भारी पड़ने लगे । वह समझ गया पाशा उल्टा पड़ गया है ।  अगर वह यहां से नहीं निकला तो आज शिकारी खुद शिकार हो जाएगा ।
  ऐसे में थोड़ी देर लड़ने के बाद उसने वहां से भागने की सोची परंतु सारे जानवर आज शेर से रोज-रोज की आंख मिचोली को खत्म करने की कसम खाकर निकले थे इसलिए वे किसी भी हाल में शेर को वहां से भागने का मौका नहीं देना चाहते थे ।
  जब शेर वहां से निकलने में खुद को असमर्थ पाया तो उसे एक नया आईडिया सूझा उसने जानवरों को चकमा देते हुए वहीं पास के एक काफी ऊंचे पेड़ पर छलांग लगा दी और उसकी एक शाखा पर जाकर बैठ गया । सारे जानवर उसे नीचे आने का निमंत्रण देने लगे परंतु शेर की हालत तो उनके सामने एक चूहे से  भी बुरी थी ।
  वह चुपचाप उसी पेड़ पर  दुबककर बैठा था । रात से सुबह हुई, सुबह से दोपहर और फिर दोपहर  से शाम हो गई परंतु शेर न तो नीचे उतरा और न ही जानवरों ने वहां से जाने का नाम लिया ।
  बहुत ही विचित्र नजारा था । जंगल का राजा शेर पेड़ दुबककर अपनी जान की दुआ मांग रहा था वहीं जंगल के बाकी जानवर नीचे, शेर बने जंगल के राजा शेर का इंतजार कर रहे थे । कई दिन बीत गए परंतु नजारा जस का तस था । भूख-प्यास के मारे पेड़ पर बैठे शेर के मानो प्राण ही निकलने वाले थे ।
  कोई रास्ता न देख आखिरकार शेर ने स्वयं बातचीत की पहल की,  शेर अपनी गलतियों के लिए उनसे माफी मांगने लगा । गर्जना छोड़ अब वह गिड़गिड़ाने लगा । काफी देर तक उसके द्वारा मान-मनौव्वल के बाद जानवर उसे जाने देने के लिए राज़ी तो हो गए पर उन्होंने अपनी एक शर्त भी रखी ।
  शर्त यह थी कि शेर इस जंगल से कोसों दूर चला जाएगा और फिर दोबारा इस जंगल की तरफ रुख नहीं करेगा ।

     "जान बची तो लाखों पाए लौट के बुद्धू घर को आए"


शेर ने उनकी सारी शर्तें फौरन मान ली और वहां से भाग निकला । अब जंगल के सारे जानवर खुशी- खुशी रहने लगे ।एकता की शक्ति के सामने जंगल के राजा शेर को भी आखिरकार झुकना ही पड़ा ।

  

                

 
                  Writer
  Karan "GirijaNandan"
                    With  
 Team MyNiceLine.com

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