"जान है तो जहान है" प्रेरणादायक हिन्दी स्टोरी. A top moral story in hindi on "if you have life you have world with you". motivational story in hindi.


जिम्मेदार बने लापरवाह नहीं - हिंदी कहानी | Be Responsible Not Careless Motivational Story In Hindi


  पिता के जाने के बाद मोनिका ने वो कर दिखाया  जिसकी आशा हमारे समाज में केवल बेटों से की जाती है । मोनिका के पिता अपने पीछे उसके दो छोटे-छोटे भाई बहन छोड़ गए । रोजमर्रा की छोटी-छोटी जंग लड़ते-लड़ते ज्ञानेश एक किराए के मकान के सिवाय कुछ भी न छोड़ गए थे । कमाल की बात यह थी कि दूसरों के जाने के बाद उनके बीमा राशि के बदौलत उनके परिवार को नया जीवन दिलवाने वाले ज्ञानेश ने अपने जाने के बाद खुद अपने बच्चों के लिए कोई बीमा नहीं कराया ।

  मोनिका, जिसने अभी तक स्कूल से घर और घर से स्कूल का सफर ही सिर्फ तय किया था उसके कंधों पर इतनी बड़ी जिम्मेदारियों का बोझ वह कैसे उठा सकती थी ।

  मोनिका ने अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना कदम आगे बढ़ाया कुछ ही दिनों में उसके बारहवी का रिजल्ट आया और वह सामान्य अंको से पास हुई हालांकि वह अंग्रेजी विषय में काफी तेज थी । उसके अंग्रेजी में अंक भी काफी अच्छे आए थे ।

  मोहल्ले वाले उसके अच्छे व्यवहार और मीठी जुबान के कायल थे ऐसे ही उसे जानने वाले उसके एक पड़ोसी ने कहा कि जब तक उसे कोई ढंग का काम नहीं मिल जाता तब तक वह चाहे तो उसके बच्चों को घर आकर अग्रेजी पढा सकती है । जिसके बदले वह उससे कुछ पैसे भी देंगे जेब में फूटी कौड़ी न होने पर ऐसा सुनहरा विकल्प मोनिका नही गवाना चाहती थी ।

उसने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया उसने अपना काम बड़ी ईमानदारी और लगन से करने की पूरी कोशिश की जिसे जानने के बाद मोहल्ले के दूसरे लोग भी उससे अपने बच्चो को पढवाने लगे ।

  कल तक स्कूल जाने वाली पापा की दुलारी मास्टरनी बन बैठी कभी मुंह में मामूली छालों की वजह से पढने स्कूल न जाने वाली मोनिका आज चाहे जितने भी समस्याएं क्यों न आ जाएं वह अपने काम में कभी कोताही नहीं बरतती ।

  हालांकि इतनी मेहनत के बावजूद कमाई बहुत कम हो रही थी परंतु फिर भी घर का खर्च ही नही बल्कि मकान का किराया  मोनिका के दोनों छोटे भाई बहनों की स्कूल की फीस कॉपी किताब का भी इंतजाम इन्हीं पैसों से हो जाया करता ।

  धीरे धीरे मोनिका जिम्मेदारियों को निभाते हुए काफी परिपक्व हो गई देखते ही देखते दोनों भाई बहन काफी बड़े हो गए । उनके साथ-साथ  उनके सपने भी बड़े होने लगे मोनिका ने उनके सपनों को ही अपना लक्ष्य बना लिया और उन्हें किसी भी हाल में न टूटने देने का मन ही मन प्रण कर लिया ।

  इसके वह इसके लिए और भी जी तोड़ मेहनत करती साथ ही वह उन दोनों का खूब ख्याल भी रखती । अपनी बड़ी से बड़ी तकलीफ को नजरअंदाज करके उनकी छोटी से छोटी परेशानी को भी बड़ा मानकर उनको ठीक करने में मोनिका जुट जाती ।

  परंतु इस ट्यूशन के बदौलत, दिन-रात परिश्रम करने के बावजूद कमाई बहुत थोड़ी होती इन सबसे केवल जिंदगी जी तो जा सकती थी परंतु उनसे किसी भी सपने को पूरा करने की कल्पना भी खुद से बेईमानी थी ऐसे में मोनिका करें तो क्या करें ।

  एक दिन उसकी एक सहेली उसके घर आई काफी देर तक उनमें बातें चलती रही तभी उसकी सहेली ने मोनिका की परेशानियों को देखते हुए उसे जॉब बदलने की सलाह दी ।

  मोनिका ने हंसते हुए सहेली से कहा
"तुम यह कैसा मजाक कर रही हो मुझसे जाब बदलने को कह रही हो तुम क्या नहीं जानती की मेरी योग्यता क्या है और इस योग्यता के आधार पर मुझे कौन काम देगा"

तब उसकी सहेली ने कहा कि
"मैं तुम्हारी काबिलियत से बखूबी वाकिफ हूं और इसीलिए मैं तुम्हें जॉब बदलने को कह रही हूं  तुम्हारी जगह यहां होम ट्यूशन पढ़ाने में नहीं बल्कि कहीं और है जहां पहुंचकर तुम न सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभा सकोगी बल्कि तुम अपने भाई-बहनों के बड़े-बड़े सपनों को भी साकार कर सकोगी"
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  सहेली की ऐसी रहस्यमयी बातों को सुनकर मोनिका आश्चर्यचकित रह गई । उसने उससे पूछा
"अच्छा ऐसा है तो बताओ मुझ में ऐसी कौन सी काबिलियत है जो खुद मैं भी नहीं जानती"
उसकी सहेली ने कहा

"देखो दुनिया में एक तुम ही नहीं ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके अंदर कोई न कोई खास हुनर मौजूद है । जिसे शायद वे खुद भी कभी समझ न सके और उसका सही जगह अगर इस्तेमाल किया होता तो वे शायद आज कहीं और होते"

मोनिका उसकी बातों को सुनकर थोड़ी उतावली हो गई । उसने उससे पूछा
"अच्छा ठीक है तो सीधे-सीधे बताओ मुझे क्या करना चाहिए"

उसकी सहेली ने कहा
"तुम्हें कॉलेज के सारे बच्चे जानते हैं कि तुम एक ऐसी खूबसूरत आवाज की मल्लिका हो जिसके दम पर तुम किसी को भी दीवाना बना सकती हो । इस आवाज का अगर तुम सही जगह प्रयोग करो तो तुम्हारी किस्मत निश्चित रूप से चमक सकती है । ऐसी ही एक जॉब के बारे में मुझे आज ही पता चला है जिसमें तुम्हारे जैसी प्यारी आवाज की बहुत ज्यादा मांग है । अगर तुम वह जॉब करो तो तुम्हें निश्चित रूप से एक बड़ी सफलता मिल सकती है । मुझे जैसे ही इस जॉब के बारे में  पता चला तो मैं फौरन तुम्हें बताने यहाँ चली आई"

मोनिका ने कहा
मोनिका उस जॉब के बारे में जानने के लिए अधीर हो गई । उसने कहा
"अच्छा तो बताओ वह कौन सा काम है मै जरुर करना चाहूंगी"
उसकी सहेली ने बताया

"तुम रेडियो पर प्रोग्राम तो जरुर सुनती होगी । पर क्या तुम जानती हो कि उस पर जो लोग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं उन्हें रेडियो जॉकी कहा जाता है । जिसमें तुम्हारे जैसी खूबसूरत आवाज वालों को वरीयता दी जाती है  मुझे लगता है कि अगर तुम ऐसे जॉब के लिए अप्लाई करो तो तुम्हें जॉब पाने में कामयाबी जरूर मिल जाएगी । इसमे पैसा काफी अच्छा है जिससे तुम्हारी काफी सारी मुश्किले दूर हो जाएंगी" 

मोनिका को उसकी बातें एक सपने से ज्यादा कुछ भी नहीं लगी परंतु उसके सामने एक  अच्छा विकल्प उभर कर आया था और  जिस को आजमाने में कुछ गलत भी नहीं था ।

  ऐसे में मोनिका ने रेडियो जॉकी के लिए तैयारी करनी शुरू कर दी । कुछ ही दिनों में उसे रेडियो जॉकी की जॉब मिल गई । उसने जॉब के बदौलत खूब पैसा कमाया ।

  अब बारी थी अपने सपनों को पूरा करने की ग्रेजुएट हो चुके भाई और बहन को प्रोफेशनल डिग्री दिलाने का सपना देख चुकी मोनिका ने देर न करते हुए भाई को MBA एवं बहन को B.Ed के अच्छे कॉलेजों में एडमिशन दिलाया ।

  माता पिता के न होने के बावजूद दोनों भाई बहनों ने कभी सोचा भी न था कि उनकी बहन उनको एक दिन कामयाबी के ऐसे शिखर पर पहुंचा देगी जहां उनके हर सपनों को पंख मिल सकेगा  हालांकि इन सभी चीजों के लिए काफी पैसे की आवश्यकता थी परंतु मोनिका को इस जॉब से इतना  पैसा जुटाना उसके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं हुआ ।

  कठिनाइयों भरी जिंदगी अब इस नए जॉब की बदौलत काफी आसान एवं सुखद हो गई थी । मोनिका की इस कामयाबी को मोहल्ले वाले देखते ही रह गए । अब वह एक आम लड़की नहीं बल्कि मोहल्ले के युवकों और युवतियों के लिए एक नजीर बन गई थी ।  हर कोई अपने बच्चों को उसके जैसा बनाने की सोचता उसने न सिर्फ दौलत ही कमाई थी बल्कि इज्जत भी उसने इस जॉब के बदौलत काफी कमा ली
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   दोनों भाई बहनों की पढ़ाई का 1 वर्ष पूरा होने को था । अब फिर से नए वर्ष में एडमिशन लेने के लिए उन्हें ढेर सारे पैसों की आवश्यकता थी हालाकि मोनिका इस बात के लिए पहले से ही सीरियस थी । इसके लिए उसने दिन रात मेहनत की अपनी बड़ी से बड़ी तकलीफ को भी किनारे करते हुए उसने अपनी कोशिशों में कोई कमी नहीं छोड़ी ।

  उसकी मेहनत रंग लाई और उसने अपने भाई-बहन के फ्यूचर को स्टेबल करने के लिए जरूरी पैसों का इंतजाम  कर लिया ।

  वह उन्हें नए कक्षा में दाखिला दिलाने की सोच ही रही थी कि तभी पैसों की इस जद्दोजहद में एक दिन जॉब के दौरान मोनिका के मुख से खून आने लगा । यह देख वहां मौजूद ऑफिस का सारा स्टाफ घबरा गया । उसे फौरन पास के अस्पताल में ले जाया गया । जहां उसकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी । बड़े अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने काफी गहराई से उसकी जांच करने के बाद उसे एक बड़े ऑपरेशन की सलाह दी ।

  असल में बचपन से ही मोनिका को अक्सर मुहँ में छाले होने की शिकायत रहा करती थी । पहले तो वह इन छालो को लेकर काफी परेशान रहती परंतु पिता के जाने के बाद उसने अपनी जिम्मेदारियों के सामने अपनी तकलीफों का जरा भी ख्याल नहीं रखा ।

  इधर नए कोर्स में दाखिला दिलाने के बाद दुसरे साल में प्रवेश कराने के लिए मोनिका पर काफी मानसिक दबाव था । वह हर हाल में अपने भाई-बहन के भविष्य पर किसी प्रकार का कोई ग्रहण नहीं लगने देना चाहती थी ।

  वह नहीं चाहती थी कि उनके सपने वैसे ही कुचल दिए जाएं जैसे पिता के अचानक चले जाने से उसके सपनों को परिस्थितियों ने कुचल दिया था । ऐसे में वह अपनी सारी तकलीफों को भूलकर दिन-रात जॉब मे मेहनत करती रही । इस बीच हुए छालो को वो इग्नोर करके उसके इलाज पर ध्यान दिए बगैर बस अपने काम में लगी रही ।

  धीरे-धीरे न जाने कब उसके छाले नासूर बन गए और एक बड़े घाव में तब्दील हो गए । घाव इतने बड़े हो गए थे कि उससे मोनिका को कैंसर का खतरा उत्पन्न हो गया ।  ऐसे में ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प था ।

  अस्पताल पहुंचे दोनों भाई बहन मोनिका की ऐसी हालत देख घबरा गए हैं । उसका ढाढस बनाने की बजाय खुद ही रोने बिलखने लगे । तब खुद मोनिका ने अपनी तकलीफों को अपने अंदर समेटे हुए उन्हें सब ठीक हो जाएगा की बात कहने लगी  ।

  थोड़ी देर में कुछ जांचों के बाद मोनिका का ऑपरेशन शुरू हो गया ऑपरेशन काफी बड़ा था जिसमें बाहर से भी डॉक्टरों को बुलाया गया था । इसलिए  इस ऑपरेशन में खर्च भी काफी ज्यादा था । दूसरा कोई विकल्प न होते हुए मोनिका ने इस ऑपरेशन के लिए हां कर दिया । इस आप्रेशन में उसके सारे जमा किए पैसे खर्च हो गए ।

  यद्यपि डॉक्टर उसकी जान बचाने में कामयाब रहें परंतु इन सबके बीच मोनिका ने अपनी खूबसूरत आवाज खो दी । गले में हुए आपरेशन के दुष्प्रभाव के कारण अब वह बोल नहीं सकती थी ।

  एक तरफ जहां उसके जमा किए हुए सारे पैसे खर्च हो गए । वही बोलने में असमर्थता के कारण जॉब से भी उसे हाथ धोना पड़ा । अब वह करें तो क्या करें इधर दूसरा वर्ष भी शुरू होने को था । स्कूल वालों की तरफ से पैसे की डिमांड भी काफी मोटी थी पर पैसा कहां से लाए ।

  अब तो घर का किराया देना भी मुश्किल हो गया था । जिसका नतीजा यह हुआ कि मोनिका के सपनों का संसार उसकी खुद के प्रति की गई छोटी-छोटी लापरवाहीयों के कारण उजड़ गया ।

Moral Of  The Story


 जान है तो जहान है जिम्मेदार बने मगर सिर्फ अपनों के लिए ही नहीं बल्कि अपने लिए भी !


  ऐसी जिम्मेदारी भला किस काम की । इसमें लाभ कम केवल नुकसान ही नुकसान था क्या आप भी ऐसे ही जिम्मेदार हैं जो अपनों की जिम्मेदारियां निभाने में खुद के प्रति बिल्कुल ही लापरवाह हैं ।
  जो अपनों के आगे खुद की तरफ ध्यान नहीं देते दोस्तों जिम्मेदारियां उठानी चाहिए क्योंकि  हमारी जिम्मेदारियां भी किसी ने उठाई होगी तभी हम आज दूसरों की जिम्मेदारियां उठाने के काबिल बने हैं
  परंतु जिम्मेदारियां हम तभी उठा सकते हैं । जब हम जिम्मेदारियां उठाने के काबिल बने रहें एक कहावत तो सुनी होगी

"जान है तो जहान है"

यानी अगर जान रहेगी  तभी हम अपनों की जिम्मेदारियों को उठा सकेंगे । वरना सब खत्म हो जाएगा जैसे मोनिका के साथ हुआ ।
  अगर आप वाकई अपनों से प्रेम करते हैं तो सबसे ज्यादा खुद का ख्याल रखें खुद को हमेशा फिट बनाए रखें क्योंकि यदि आप फिट रहेंगे तभी कुछ कर सकेंगे । वरना खुद के प्रति लापरवाही आपको ज्यादा दिनो तक कुछ भी करने की योग्य नहीं रहने देगी ।

जिम्मेदार बने परंतु सिर्फ अपनों के लिए ही नहीं बल्कि अपने लिए भी !



         Writer
        Karan "GirijaNandan"
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