"जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा : दो मेंढको की कहानी" प्रेरणादायक हिन्दी स्टोरी. A best moral story in hindi. inspirational short story of two frogs in hindi

जिन्दगी को देखने का सही नजरिया क्या है - प्रेरणादायक हिन्दी स्टोरी | What Is The Right View Of Life -  Inspirational Short Story In Hindi


  गांव के तालाब के पास ही सुखिया और दुखिया दो मेंढक रहा करते थे । वे दोनों एक दूसरे के जितने करीब थे । विचारों से वे उतने ही दूर थे । दुखिया जहां ईश्वर से मिले इस जीवन के लिए सदैव ईश्वर को धन्यवाद दिया करता, वहीं दूसरी ओर सुखिया जीवन में मिली छोटी छोटी परेशानियां के लिए भी ईश्वर को खूब कोसता ।

  हालांकि उसके इस व्यवहार की वजह उसे देखकर ही समझ आ जाती है ।  सुखिया वैसे तो शरीर से स्वस्थ था परंतु उसे कुबड़ निकला हुआ था । जिसकी वजह से उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता ।

  वहीं दुखिया को भी कम मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता । उस बेचारे की तो अगले दो टांग में एक टांग जन्म से ही विकसित नहीं हुई थी । इस प्रकार वह तीन टांगों वाला मेंढक था । ऐसा जीवन पाकर भी दुखिया कभी ईश्वर को नहीं कोसता, बल्कि वह ईश्वर को इस जीवन के लिए उन्हें धन्यवाद करता ।

  जबकि सुखिया के जब उसके दोस्त कुबड़ा कहकर चिढ़ाते तो वह काफी गुस्सा होता और उनसे मिली नाराजगी को वह ईश्वर पर उतारता । वह कहता

"इससे तो अच्छा होता कि मैं मर ही क्यों न जाता । रोज रोज की परेशानियों से मुक्ति मिल जाती, क्या जरूरत थी ऐसी जिंदगी देने की"

  ऐसी में दुखिया उसे समझाता वह उससे कहता 
 "देख दोस्त तुम्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए तुम ये सोचो कि ईश्वर ने तुम्हें जो जीवन दिया है वह जैसा भी है उसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है । तुम्हें हमेशा खुश रहकर इस जिंदगी के लिए ईश्वर को धन्यवाद करना चाहिए"

  सुखिया उसकी ये बड़ी-बड़ी बातें सुनकर खूब चिढ़ता, वह कहता

 "तुम तो कहोगे ही तुम्हें नहीं मिला न ऐसा शरीर जिसे देख कर सब तुमपर हंसे, तुम्हे कुबड़ा-कुबड़ा कहकर   तुम्हारा मजाक बनाए । तुम क्या समझोगे मेरे दुख को जाओ तुम भी उनके साथ जाकर मेरा मजाक उड़ाओ"

उस की ऐसी बातें भी दुखिया को विचलित नहीं कर पाती । सुखिया जब भी ऐसी बातें करता तो दुखिया उसे खूब समझाता परंतु उसकी बातें सुखिया के पल्ले नहीं पड़ती । इस प्रकार सुखिया और दुखिया अपने नाम से बिल्कुल विपरीत थे ।
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  जहां सुखिया हमेशा दुखी और ईश्वर को कोसने वाला था, वही दुखिया हमेशा खुश और दूसरों को खुशी देने वाला था । एक बार जब दोनों मेंढक कुएं के पास खेल रहे थे । तभी अचानक वहां एक बाज आ धमका । उसने शायद उन्हें आज का अपना निवाला बनाने की सोचा जैसे ही दोनों मेंढक ने उसे देखा वे सरपट वहां से भागना चाहे ।

  परंतु अपने-अपने शारीरिक विकारों के चलते बहुत तेजी से भागने में खुद को वे असमर्थ पा रहे थे । बहुत प्रयासों से वे अभी भाग कर पत्थर के टीले के पास ही पहुंचे थे कि बाज ने सुखिया को दबोच लिया ।

  दुखिया इतना डरा हुआ था कि भागने में वह जान भी नहीं पाया कि उसका परम मित्र किसी खतरे में पड़ चुका है परंतु तभी सुर्खियां ने उसे आवाज़ लगाई उसकी आवाज सुनकर दुखिया ने पीछे मुड़कर देखा कि बाज उसे अपनी चोच में दबाए जा रहा है और चोच से छूटने के उसके दोस्त के सारे प्रयास एक एक करके विफल होते जा रहे हैं ।

  दोस्त को ऐसी मुश्किल में फंसा देखकर दुखिया अपनी जान की चिंता छोड़ दोस्त की जान बचाने वापस मुड़ा और बाज के ऊपर कूद पड़ा । उसने अपने सामर्थ्यभर  दोस्त को छुड़ाने का भरसक प्रयास करता रहा ।

  आखिरकार दुखिया और सुखिया का सम्मिलित प्रयास रंग लाया । सुखिया बाज के चंगुल से आजाद हो गया । अपने शिकार को हाथ से छूटता देख बाज अत्यंत क्रोधित हो गया और अपनी असफलता की मुख्य वजह दुखिया को सबक सिखाने की ठान ली ।

  एक दिन जब दुखिया तालाब किनारे बैठा हुआ था । तभी ऊपर उड़ रहे बाज की नजर दुखिया पर पड़ी । वो उसे पहचान गया बाज उस दिन की घटना को भूला नहीं था । वो उससे बदला लेने के लिए झट से उसके पास आ गया और उस पर प्रहार कर दिया । दुखिया जब तक यह सब समझ पाता तब तक काफी देर हो चुकी थी ।

  वह अब भागने या कुछ करने की स्थिति में नहीं था । बाज और उसके बीच लड़ाई चल रही थी । तब तक अन्य मित्रों के साथ सुखिया वहां आ धमका । परंतु तब तक काफी देर हो चुकी थी । दुखिया बुरी तरह से घायल हो चुका था ।

  वह अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा था । जाते जाते उसने अपने दोस्त को हमेशा खुश रहने की बात कहता गया । उसके जाने के बाद सुखिया काफी दुखी हुआ और हो भी क्यों नहीं उसने अपने जान से ज्यादा प्यारा मित्र खो दिया था और उसकी जान भी तो सुखिया के नाते ही तो गई थी ।
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  वह काफी दिनों तक उसके गम में बेसुध पड़ा रहा । कुछ दिनों बाद जब उसने खुद को संभाला तो अपने अंदर आए एक और ऐब को देखकर एकदम से झल्ला गया । असल में पिछली बार दुखिया को बाज से बचाने में सुखिया भी बुरी तरह घायल हो गया था इन सबके बीच उसने अपनी अगली एक टांग खो दी थी ।

  एक तो पहले से ही वह कुबड़ से ग्रस्त था दूसरे उसके पास अब सिर्फ तीन टांगे थी वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा और अपना माथा पीटने लगा वह एक बार फिर ईश्वर को कोसने लगा और बोला

  "इससे तो अच्छा होता कि मैं मर ही जाता । इन परेशानियों से हमेशा के लिए मुझे छुट्टी  मिल जाती"
वह काफी फ्रस्टेट था परंतु अब तो वहाँ उसे कोई समझाने वाला भी नहीं था । इन बातों से दुखी मेढ़क एक दिन गांव में कुएं के पास खेल रहा था ।

  तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे कुएं में धड़ाम से जा गिरा गहरे कुएं मे पानी काफी होने से उसे चोट नही लगी । वह उसमे सेफ था । कुछ दिन तो उसे इस नई दुनिया में काफी अच्छा लगा परंतु थोड़े ही दिनो में उसे बाहर की दुनिया याद आने लगी ।

  वह कुएं से निकलना चाहा परंतु अफसोस कि वह अपने लाख प्रयासों के बावजूद इस कार्य में असफल रहा । जब उसके सारे प्रयास  निष्फल हो गये तो वह थक हारकर कुएं से ऊपर नीले आसमान को निहारने लगा ।

  उसे बाहर की दुनिया की बहुत याद आने लगी । जैसे-जैसे वक्त बीतता गया उसे अपने कुएं और तालाब के पास की सारी मस्ती खेलकूद याद आने लगा । उसे अपने उन बुरे दोस्तों की भी कमी खलने  लगी अब उसे भी  वे भी अच्छे लगने लगे ।

  उन गुजरे हुए पलो को जिसे बहुत ही बुरा समझता था और जिसके लिए वह सदैव ईश्वर को बुरा-भला कहता था । अब वही गुजरा हुआ वक्त उसे गुड-टाईम के रूप में याद आने लगा ।

  वह वापस अपनी वही जिंदगी चाहता था उसे जीना चाहता था उसके मजे लेना चाहता था । उसे लुत्फ उठाना चाहता था जो कल तक उसे बहुत बुरी लगती थी, जिसके लिए वह ईश्वर को हमेशा कोसता और जिससे वह हमेशा के लिए छुटकारा भी चाहता ।
    

Moral Of  The Story


ईश्वर से प्राप्त जीवन को सर्वोत्तम मानकर इसके लिए हमेशा ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए साथ ही इन पलों का आनंद उठाने एवं इसे और बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए !

    



   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
 Team MyNiceLine.com

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