रवीश और कपिश के उम्र में सिर्फ एक साल का अंतर था। दोनों भाई कम, दोस्तों की तरह ज्यादा थे, दोनों की दोस्ती भरे प्रेम को देखकर माता राजकुमारी देवी काफी प्रसन्न रहती थी। दोनों भाइयों ने पढ़ाई पूरी करके जॉब की तैयारी करनी शुरू कर दी, बड़े भाई रवीश की जॉब भी जल्द ही लग गई, दोनों की शादी भी हो गई।

    शादी के बाद जॉब मिलने पर पत्नी संग कपीस भी शहर आ गया। क्योंकि रवीश का फ्लैट काफी छोटा था। अतः दोनों की राय से रवीश के ठीक सामने ही एक फ्लैट लेकर कपिश उस में शिफ्ट हो गया। दोनों के बीच के जैसा प्यार उनकी पत्नियों के बीच भी हो गया ।

   एक दिन अचानक मोबाइल पर गांव में रहने वाले रवीश के चचेरे भाई रिंकू का फोन आया उसने बहुत दुखद समाचार सुनाया उसने बताया कि रविश और कपीस की माता राजकुमारी देवी का सुबह हार्ट अटैक के कारण स्वर्गवास हो गया है। दोनों भाई जैसे तैसे परिवार के साथ गांव चले आए, चिता को अग्नि देने के पश्चात आगे के कार्यक्रम की तैयारी होने लगी। इस बीच एक दिन गांव के ही एक बुजुर्ग ने दोनों के सामने समय रहते आपस में जमीन जायदाद का सही से बंटवारा कर लेने की बात छेड़ दी ।

   जाने क्यों यह छोटी बात दोनों के कानों में गूंज उठी फिर क्या था। माता के अंतिम संस्कार के मध्य ही बटवारा का कार्यक्रम भी होने लगा। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था के तभी घर के बंटवारे को लेकर दोनों भाइयों में कुछ विवाद हो गया। बात इतनी बढ़ गई, की दोनों के बीच मारपीट की नौबत आ गई पटिदारो के समझाने पर माता की तेरहवीं तक इस पर कोई वाद विवाद करने से दोनों ने खुद को रोक लिया।
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    इधर मां की तेरहवी गुजरते न देर कहो की इधर दोनों में पुनः विवाद गरमाने लगा, आखिरकार पंचायत बुलाई गई पंचो के निर्णय के अनुरूप घर का बटवारा किया गया। बंटवारा की यह दीवार केवल घर में ही नहीं बल्कि उनके रिश्ते में भी खड़ी हो गई, जन्मों के रिश्ते जमीन के चंद टुकड़ों के सामने टूट कर बिखर गए।

   बटवारे के बाद दोनों भाई वापस शहर अपने अपने काम पर लौट गए। आज वही शहर था, वही फ्लैट वही लोग कुछ नहीं बदला था, कुछ बदला था उन रिश्तों का मायने और उनको देखने का नजरिया आज दोनों परिवार आमने सामने थे। वैसे तो दोनों घरों के बीच का फासला महज चार कदम ही था। पर असल में वो दोनो परिवार एक दूसरे से मिलो की दूरी पर जा खड़े थे। दोनों भाइयों को एक दूसरे की सूरत देखने भी अब पसंद नहीं था।

    धीरे-धीरे वक्त बीतता गया गांव में पिंकू की बेटी की शादी तय हो गई थी। दोनों भाइयों को स्वयं पिंकू ने शहर आकर शादी में आने का निमंत्रण दिया था। हल्दी के दिन दोनों भाई गांव के लिए निकल पड़ते हैं मां के देहांत के बारह वर्षों बाद आज दोनों भाई उसी रास्ते पर निकल पड़े हैं, बस फर्क ये है कि दोनों आज साथ साथ नहीं बल्कि अलग-अलग ट्रैवल कर रहे हैं।

   गांव पहुंचने पर पिंकू दोनों का बहुत आदर सत्कार करता है । दोनों भाई शादी के कार्यक्रम में खूब इंजॉय कर रहे हैं। हां पर  जैसे ही उनकी निगाहें एक दूसरे से टकराती दोनों की खुशी क्रोध में बदल जाती।  शादी के दूसरे दिन पिंकू के घर के बरामदे में रिश्तेदारों एवः गांव के अन्य लोगो के साथ ही दोनों भाई भी बैठे हैं। पिंकू के घर के ठीक सामने  वाला ही घर रवीश कपीस का है, दोनों की निगाहें अचानक अपने घर पर पड़ती है।

    मां के देहांत के बाद पिछले बारह वर्षों से यह घर अपनो की राह देख रहा है। दोनों भाई व्यस्तता की वजह से अपने उस बहुमूल्य धन जिसके लिए उन्होंने अपने दूध के रिश्ते को भी लात मार दिया, उसको देखने की उन्हे फुर्सत नहीं रही, मकान एक विरान खंडहर सा दिखता है, मकान के दरवाजे पर धूल जम चुकी है। जिसके लिए दोनों भाइयों ने अपने प्यार भरे रिश्तो पर धूल जमा ली। यह सब देखकर दोनों भाइयों को असली धन का मतलब समझ में आ जाता है। दोनों की आंखें भर आती हैं। दोनों का सुखद मिलाप होता है।

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         Writer
        Karan "GirijaNandan"
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