"क्या आप खुद को ईश्वर से मिले उपहार को जानते हैं" प्रेरणादायक हिंदी स्टोरी लोग | "what is your god gifted skills" inspirational story in hindi with moral |


क्या आप अपनी God Gifted Skills को जानते है हिंदी स्टोरी | Hindi Story


 राम के पिता महानगर में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके अपनी जीविका चलाया करते थे । अभाववश राम की शिक्षा दीक्षा काफी पहले ही बंद हो गई । कुछ दिनों बाद जब राम बड़ा हुआ तो उसने अपने पिता के साथ महानगर जाने की सोची । गर्मियों का महीना था पिताजी कुछ दिन के लिए घर वापस आ रहे थे । राम पिता को लेने स्टेशन पहुंचा । काफी देर इंतजार के बाद ट्रेन रुकी ट्रेन में से उतर रहे पिता की हालत देखकर राम के मन में महानगर जाकर खुद काम करने की इच्छा और प्रबल हो गई ।

  घर आने के बाद राम ने पिता से इस बार उसे भी अपने साथ शहर ले जाने को कहा परंतु राम के पिता शहर के थपेड़ों से भलीभांति परिचित थे ऐसे में वे राम को वहां नहीं ले जाना चाहते थे परंतु बार-बार राम द्वारा  जोर दिए जाने पर आखिरकार पिता उसे अपने साथ वहा ले जाने को राजी हो गए वहां पहुंचकर राम पिता की तरह दिहाड़ी मजदूर का काम करने लगा ।

  दोनों के कमाने से घर की हालत में काफी सुधार आया हालांकि राम के पिता अपने कम पढ़े लिखे बेटे को ऐसी जगह लगवाना चाहते थे जिससे उसका जीवन उनकी तरह ही  दर-दर की ठाकरे खाते ही न गुजर जाए । वे जानते थे कि दिहाड़ी के मजदूर का अपना कोई भविष्य नहीं होता ।

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  एक दिन राम के पिता को पास के ही स्टेडियम में साफ सफाई के लिए मजदूरों की होने वाली नई भर्ती की सूचना मिली । राम के पिता ने वहां अपने बेटे को रखवाने के लिए जी जान लगा दी । स्टेडियम में कई मजदूरों से राम के पिता की जान पहचान थी । ऐसे में उन्होंने उन सब से बात करनी शुरू कर दी वैसे तो राम काफी मेहनती था परंतु  अंतिम फैसला तो वहां के मैनेजर को ही करना था । स्टेडियम मैनेजर ने उससे काम के अनुभवों के बारे में पूछा । काफी देर तक चले मैनेजर के सवाल जवाब के बाद अस्थाई तौर पर राम को स्टेडियम में नौकरी मिल ही गई । राम यह जॉब पाकर काफी खुश था हालांकि यहां भी पैसा तो दिन के हिसाब से ही  मिलता परंतु यहां 30 दिन काम मिलना फिक्स था ।

  उसे अब रोज-रोज काम ढूंढने की आवश्यकता नहीं थी और यहां से उसे अब यूं ही कोई निकाल भी नहीं सकता था । बेटे को यह नौकरी दिला कर पिता अब काफी खुश थे । उन्हे बहुत सुकून मिला थे । बेटे को जॉब दिलाने के बाद कुछ दिनों के लिए राम के पिता गांव लौट आए ।

  नई जगह पर काम कर रहे राम ने वहां कुछ नए दोस्त भी बनाए । राम के दोस्त भी उसी की तरह ही दूर गावों से आए थे । सारा-सारा दिन साथ रहने के कारण वे एक दूसरे से ढेर सारी बातें भी शेयर किया करते थे । ऐसे ही एक दिन जब सभी दोस्त दोपहर में लंच ब्रेक में एक साथ बैठकर भोजन कर रहे थे । उसी समय राम के एक दोस्त ने बताया कि

 "वह बड़ा होकर एक  डॉक्टर बनना चाहता था परंतु देखो उसकी किस्मत को, पिताजी  के अचानक चले जाने से उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही बंद करनी पड़ गई और किस्मत उसे आज कहां से कहां ले आई आज उसे वह काम करना पड़ रहा है जो उसने कभी शायद सपने में भी नहीं सोचा था"

तभी उसकी बातों को सुनकर वही खाना खा रहे उसके एक दूसरे दोस्त ने कहा

 "यार ऐसी ही कहानी तो मेरी भी है मैं पढ़ाई में तो तुम्हारे जैसा नहीं था मगर मैं वॉलीबॉल का एक अच्छा खिलाड़ी था । अपने छोटे से गांव में, मैं वॉलीबॉल के लिए फेमस था । मेरा भाई मुझे हमेशा वॉलीबॉल में अपना भविष्य संवारने के लिए प्रेरित किया करता था । मगर दुर्भाग्य से मैं उसमें कुछ ज्यादा नहीं कर सका और आज देखो मेरी किस्मत मुझे कहां ले आई । मैंने बचपन से ही एक खिलाड़ी के तौर पर स्टेडियम्स में खेलने का सपना संजोया था  पर किस्मत का खेल देखो आज एक स्टेडियम तक तो मैं जरूर पहुंच गया परंतु एक खिलाड़ी के तौर पर नही बल्कि एक सफाई कर्मी के तौर पर "

  यह सब बाते राम बहुत ध्यान से सुन रहा था और शायद वह भी अपने किसी टूटे सपने को याद कर रहा था परंतु वह चुप था वह किसी से कुछ भी नहीं कह रहा था । तभी वहां बैठे उसके दोस्तों ने राम से कहा
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"क्यों यार तुम क्यों इतने चुप हो क्या तुम भी कुछ कहना चाहते हो । अगर कुछ कहना चाहते हो तो कह डालो मन में बात रखकर मन ही मन दुखी होने से कोई फायदा नहीं ।
तब राम ने बताया कि 


 "हम सब अपनी लाइफ में जो करना चाहते थे वह नहीं कर सके मगर मेरे ख्याल से इतनी जल्दी हार मानने की जरूरत नहीं वक्त कोई न कोई अवसर हमें जरूर देगा । बस हमें उस वक्त का इंतजार करने एवं उस अवसर को पहचानने की जरूरत है "


  राम की इस विश्वास भरी बातों ने वहां बैठे सभी दोस्तों के दुख को काफी कम कर दिया । सभी ने राम की बातों से सहमति जाहिर की ।

  स्टेडियम में मजदूरी करते हुए राम को काफी वक्त गुजर गया । राम हमेशा तन-मन से अपने काम में लगा रहता । मगर उसे नहीं पता था कि स्टेडियम में कोई ऐसा भी शख्स है जो उसे वाच कर रहा है । वह था स्टेडियम में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने वाला कोच । उसकी नजरें हमेशा राम पर जाकर टिक जाती ।

   स्टेडियम की साफ सफाई के दौरान उसने देखा कि राम स्टेडियम के एक छोर से दूसरे छोर पहुंचने में औरों से काफी कम वक्त लेता । जब वह काम के सिलसिले मे अपने साथियों के साथ स्टेडियम के एक छोर से दूसरे छोर की तरफ पैदल चलकर जाता तब उसके कुछ दोस्त उससे काफी पीछे छूट जाते और बाकी उसके पीछे-पीछे दौड़ते नजर आते ।

  कोच यह बात काफी गौर से देखता और यह देखकर उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कुराहट आ जाती । एक दिन शाम को जब राम स्टेडियम में काम कर रहा था । तभी कोच ने उसे अपने पास बुलाया ।  राम सारा काम छोड़कर कोच के पास पहुंचा और पूछा

 "हां साहब बताइए क्या काम है " 
  तब कोच ने मुस्कुराते हुए राम से कहां 
 "यार काम तो बहुत कठिन है क्या तुम कर पाओगे"

  राम 
 "हां साहब क्यों नहीं आप बताइए तो सही मैं जरूर करूंगा और काफी सफाई से करूंगा मेरे काम के बारे में आप यहां किसी से भी पूछ सकते हैं "
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  कोच ठहाके मार कर हंसने लगा राम सोचने लगा उसने ऐसी कौन सी बात कर दी जिसकी वजह से कोच उस पर इतना हंसे जा रहा है । थोड़ी देर बाद कोच ने उससे कहा कि

 "मैं जानता हूं कि तुम अपने काम को काफी ईमानदारी और सफाई से करते हो मगर यह काम वैसा नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो । मेरे पास तुम्हारे लिए एक दूसरा काम है जो तुम्हारी किस्मत बदल सकता है मुझे लगता है कि तुम्हारी जगह इस स्टेडियम में वर्कर के तौर पर नहीं बल्कि कहीं और है जहां पहुंचकर तुम न सिर्फ अपने माँ-बाप का बल्कि पूरे देश का नाम रौशन कर सकते हो"

  राम ने पूछा 
 "ऐसा कौन सा काम है साहब मुझे बताइए मैं जरूर करूंगा "
  कोच

"देखो हर किसी में कोई न कोई गॉड गिफ्ट जरूर होती है और तुम्हारे अंदर भी ऐसी ही एक गॉड गिफ्ट है । तुम उसे इस्तेमाल करके अपना भविष्य संवार सकते हो"


  तब राम ने पूछा 
 "ऐसी क्या खूबी है मेरे अंदर जिसे मैं नहीं जानता साहब"

  तब कोच ने बताया 
 "मैंने काफी दिनों से तुम्हें स्टेडियम की साफ सफाई करते वक्त स्टेडियम के एक छोर से दूसरे छोर तक जाते देखा है मैंने देखा है कि तुमने एक आम आदमी से काफी तेज चल सकते हो । तुम्हारे अंदर तेज चलने की कमाल की प्रतिभा है जो शायद ईश्वर से तुम्हे उपहार स्वरूप मिली है । इसे तुम सामान्य मत समझो यह वाकई चौकाने वाली बात है । इसे वही समझ सकता है जिसने तुम्हें ऐसा करते हुए देखा हो और मैंने खुद अपनी आंखों से यह दृश्य एक बार नहीं कई बार देखा है । तुम्हारे अंदर ये जो काबिलियत है इसका सही उपयोग करके तुम अपने भविष्य को एक नया रंग दे सकते हो "

  राम को कोच की बातें थोड़ा खुश तो थोड़ा आश्चर्यचकित भी कर रही थी आखिरकार राम कोच की बातों को मानकर उनके कहे अनुसार उसी स्टेडियम में खाली समय में अभ्यास करने लगा ।  कोच की देखरेख में आखिरकार राम की मेहनत रंग लाई और वह अपने इस टैलेंट को और बेहतर बनाने में सफल रहा ।

  कुछ ही दिनो बाद वह पैदल चलने वाली कई प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेना शुरू कर दिया । शुरुआती सफलताओं ने ही कोच की बातों को एकदम सही साबित कर दिया । राम को यह बात समझ में आ गई कि कोच द्वारा दिखाए गए सपने केवल कल्पनाओं पर आधारित नहीं थे बल्कि वाकई उसकी एक वास्तविक जमीन भी थी ।

  राम ने कुछ ही दिनों में कई बड़ी-बड़ी प्रदेशस्तरीय   प्रतिस्पर्धाओं में सफलता हासिल की और इस प्रकार राम ने अपने साथ-साथ अपने पूरे परिवार के भविष्य को एक नया रूप दे दिया ।

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है | Moral Of This Inspirational Hindi Story


हर किसी में कोई न कोई God Gift ज़रूर होता है जिसे पहचानकर हम अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं !



  आपको याद होगा कुछ समय पहले ही हमारे देश में  ही एक छोटी सी  उम्र का बच्चे ने दुनिया में काफी तेज दौड़ने की कला में महारत हासिल कर लिया था ।  कुछ लोगों की याददाश्त  काफी तेज होती है । वह जो एक बार देख लेते हैं उसे ताउम्र याद रखते हैं । कुछ लोग ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं होते हैं परंतु उनके बात करने की कला काफी प्रभावशाली होती है । कुछ लोग की आवाज काफी कर्ण प्रिय होती है ऐसे आपको ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे जो यह साबित करने के लिए काफी है कि हर किसी में कुछ ऐसे गुण जन्म से ही उसमे विद्यमान होते हैं जो वाकई उसे महान बना सकते हैं । हमें भी अपने अंदर छुपे ऐसे ही God Gift को पहचानना होगा और उसी के अनुसार अपने सफलता के मार्ग को चुनना होगा । अगर हम ऐसा करने में सफल रहते हैं । तो definitely  रूप से हमें success पाने से कोई नहीं रोक सकता ।                                 


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   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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