07 July, 2018

विश्वास पर टिकी है रिश्तों की डोर प्रेरक कहानी | Hindi Story On Trust

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रिश्तों मे विश्वास का महत्व बताती प्रेरणादायक हिंदी स्टोरी| inspirational hindi story on faith and relationships with moral


रिश्तों मे विश्वास बनाए रखें कहानी | Story On Faith And Relationships



  घर में हर तरफ खुशियों का ही माहौल है । सुबह से ही रिश्तेदारों के आने का सिलसिला लगा हुआ है । बुआ, मौसी, मामी सभी के सभी आज जसवंत के घर पहुंचे हुए है । आज जसवंत की इकलौती बिटिया का तिलक जाने को है । तिलक की सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं । अब तो सिर्फ सबके निकलने का वक्त हो रहा है अचानक तभी सबका ध्यान जसवंत के बड़े बेटे मनोहर पर जाता है ।

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  मनोहर आज दोपहर बाद से ही दिखाई नहीं दे रहा था । इधर-उधर काफी ढूंढने के बाद भी मनोहर के न मिलने पर उसके पिता मन ही मन उसपर काफी नाराज हुए जा रहे हैं । बड़बड़ाते हुए वे उसके जिगरी यार के घर जा रहे हैं । मगर उसे भी मनोहर के बारे में कोई जानकारी नहीं है । चारों तरफ दौड़ लगाने के बाद आखिरकार थक-हारकर जसवंत घर आ गये ।  इधर रिश्तेदार, दोस्त-मित्र सब के सब, चलने के लिए उन पर दबाव डाल रहे हैं ।

  मगर जिसे बिटिया का तिलक चढ़ाना है उसी के गैरमौजूदगी में आखिर गाड़ी आगे बढ़े तो बढ़े कैसे ऐसे में जसवंत को हर तरफ से पिसना पड़ रहा हैं । तभी अचानक उनकी घर की चौखट पर कोई दुल्हन खड़ी होती है और साथ में उसकी बांहें थामे मनोहर खड़ा है । जवान बेटा अगर ऐसे अचानक किसी दुल्हन का हाथ पकड़े दरवाजे पर खड़ा हो जाए तो फिर ज्यादा कुछ समझने के लिए बाकी नहीं रहता । मनोहर के घर वालों को सारी बात समझ में आ गई थी ।

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  मगर ऐसे दिन और वह भी ऐसे मौके पर मनोहर के ऐसे कदम से सब के सब आश्चर्यचकित है किसी के मुख से कुछ भी नहीं निकल रहा था । ऐसे में मनोहर ने पिता से अंदर आने की अनुमति मांगी । फिर क्या था देखते ही देखते उनमें बहस छिड़ गई । मनोहर की माँ और उसकी बहन दुल्हन को किसी भी हाल में घर में रखने को तैयार न थे । मगर जसवंत काफी सुलझे हुए व्यक्ति थे । वे जवान बेटे की मन की स्थिति को भली-भांति समझ रहे थे ।

  ऐसे में उन्होंने घर के सभी लोगों को डांट फटकार कर कोने कर दिया और खुद थाली लाकर दुल्हन के घर में प्रवेश करने की सारी रस्में पूरी की । अब तो अजीब हालत थी बेटी की तिलक के जाने की तैयारी की जाए या नववधू के आगमन का स्वागत, जैसे तैसे जसवंत बेटे को लेकर बिटिया का तिलक चढ़ाने बिटिया के नई नवेली ससुराल की ओर चल पड़े ।  वहां पहुंचते ही नए माहौल ने उन्हें सब कुछ भुला दिया था । मगर जैसे ही वह लौट कर वापस घर पहुंचे फिर वही प्रपंच शुरू हो गया ।

  मगर जसवंत के कड़े रुख के कारण माँ बेटी की एक न चली और आखिरकार मनोहर की पत्नी को बेमन से सही अपने घर की बहू उन्हे स्वीकार करना पड़ा । धीरे धीरे काफी समय गुजर गया और इसी बीच जसवंत ने भी इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया परंतु इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी मनोहर की माँ और उसकी बहन के मन से उसकी पत्नी के प्रति जहर जरा सा भी कम नहीं हुआ । बल्कि कुछ न कर  पाने के कारण नाराजगी दिन-प्रतिदिन और बढ़ता चला गया । जसवंत के जाने के बाद अब ससुराल में मनोहर की पत्नी का उसके सिवा दूसरा कोई सगा नहीं बचा  । सब के सब बस किसी तरह से उसे यहां से निकालने के ही मौके तलाशते रहते ।

  एक दिन जब मनोहर ऑफिस से लौट कर घर आया तब उसकी पत्नी ने उससे अपने मायके जाने की इच्छा जाहिर की । चूंकि शादी के बाद से उसकी पत्नी कभी मायके नहीं गई थी इसलिए मनोहर भी इस बात के लिए फौरन राजी हो गया । मायके पहुंचकर मनोहर की पत्नी बहुत खुश हुई ।

   वैसे तो इस प्रेम विवाह से उसके मायके वाले भी बहुत खुश नहीं थे । मगर समय के साथ बेटी से जो नाराजगी थी वो अब धीरे-धीरे कम हो चुकी थी । ऐसे में इतने दिनों बाद घर लौटी बेटी को सबने हाथों हाथ लिया । मायके मे मिले अपार प्रेम मे डूबी, मनोहर की पत्नी को वक्त का पता ही नहीं चला और धीरे-धीरे लगभग एक महीना बीत गया । ऐसे में उसने अब ससुराल लौटने की सोची । तब उसकी माँ ने कहा

   "देखो बेटा हम सब तुम्हारे ससुराल मे तुम्हारी स्थिति को भली भांति जानते हैं हम जानते हैं कि वहां तुम्हारा कोई सगा नहीं सिवाय मनोहर के सबके सब तुमसे बस पिंड छुड़ाना चाहते हैं । तुम वहां सब की आंखों में गड़ती हो इसलिए वहां सब के सब बस तुम्हें किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशने मे लगे रहते हैं । मुझे डर है कि मौका मिलने पर वे तुम्हारी कीमती चीजों पर भी हाथ साफ करना चाहेंगे । ऐसे में मैं समझती हूँ कि तुम्हें अपने गहनों को यहीं रख जाना चाहिए ताकि वे हमेशा यहां सुरक्षित पड़े रहें और फिर तुम जब चाहे उनका उपयोग कर सकती हो"


  माँ की बातें मनोहर की पत्नी को ठीक लगी । ऐसे में उसने मनोहर के पिता द्वारा उसके लिए बनवाए गए सारे गहनों को वहां अपनी पुरानी अलमारी में लॉक करके अपने ससुराल लौट आई ।

  धीरे-धीरे काफी समय गुजर गया । इधर काफी समय से मनोहर को अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रही मनोहर की माँ और उसकी बहन अपने इरादों में काफी हद तक कामयाब हो रहीं थी । मनोहर अपनी माँ और बहन की  बातों को अब तवज्जो देने लगा था । जिसका नतीजा वही हुआ जो मनोहर की माँ और उसकी बहन ने पहले से सोच रखा था । मनोहर और उसकी पत्नी के बीच प्यार भरा संबंध धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा । कल तक जो मनोहर अपनी पत्नी की हर बात को सर आंखों पर रखता था । वहीं उसे अब पत्नी की हर बात बुरी लगती  वह अब बात-बात पर उससे झगड़ता रहता।

  एक दिन सालों से मायके न जा सकी मनोहर की पत्नी ने, मायके जाने की अपनी इच्छा को  मनोहर बताया । उसने सोचा कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी मनोहर उसकी बात को सुनते ही उसके मायके जाने के लिए हां कर देगा ।
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  मगर अब हवाएं बदल चुकी थी । मनोहर ने पत्नी को मायके भेजने से साफ मना कर दिया । धीरे-धीरे काफी वक्त गुजर गया । मनोहर की पत्नी उससे अक्सर अपने मायके जाने की बात कहती पर वह हर बार उसे मायके जाने से मना कर देता । अब तो आलम यह था कि मनोहर उसके मायके जाने की बात से ही चिढ जाता था ।

  आखिर उसकी पत्नी उसकी गलत बातों को कब तक बर्दाश्त करती । ऐसे में एक दिन वह अपने पति को बिना बताए मायके चली गई । मायके मे इस बार सब का व्यवहार कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा था । कोई भी उसके आने से खुश नहीं था । सब बस उसके जाने की तारीख पूछने में लगे थे ।

  तभी उसे कहीं से पता चला कि इसी महीने उसकी छोटी बहन की शादी तय हो रखी है जब उसे ये बात पता चली तब उसे बहुत जोर का झटका लगा क्योंकि जो माता-पिता उसे पिछली बार हाथों-हाथ ले रहे थे । उसके आने से वे फूले नहीं समा रहे थे । इस बीच उसने ऐसा क्या कर दिया था कि सब के सब उससे दूरी बनाने की कोशिश कर रहे थे । सब बस उसके जाने की ही राह देख रहें थे ।

  उसे समझ मे आ गया कि अगर वह अपने से यहां नहीं आती तो शायद उसे बहन की शादी में बुलाया भी नहीं जाता । ऐसे में मनोहर की पत्नी को ऐसे मौके पर यहां आके बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी ।  उसे लगा कि उसने यहां आकर बहुत बड़ी गलती कर दी है । अब वह 'न घर की रही न घाट की' पहले तो पति को नाराज करके मायके आना और फिर मायके वालों का ये रंग, यह सब देखकर मनोहर की पत्नी बिल्कुल टूट सी गई ।

  फिर भी उसके मन में अपनी बहन के लिए प्यार तनिक भी कम न हुआ । उसने यहां से जाने से पहले बहन को कोई अच्छा उपहार देना चाहा परन्तु उपहार के लिए उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे ऐसे में उसने यहां रखें अपने गहनों में से उसे कुछ देने की सोचकर अपनी अलमारी खोलकर उसमे से गहनों को निकालना चाहा, परंतु अलमारी खोलते ही उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई । आलमारी का लॉक खोलते ही उसने देखा कि आलमारी के अंदर तो सिर्फ गहनों के खाली डिब्बे पड़े हैं । उन डिब्बो में एक भी गहने नहीं हैं । सारे गहने गायब हैं ।

  ऐसा कौन कर सकता है जबकि आलमारी बाहर से लॉक है मनोहर की पत्नी को कुछ सूझ नहीं रहा था ऐसे में उसने अपनी माँ को आवाज लगाई । बगल मे स्थित, किचन में काम कर रही माँ मानो बहरी हो गई थी । कई बार आवाज लगाने के बावजूद उसके कानों में जूं तक नहीं रेंगी । ऐसे में वह स्वंय माँ के पास पहुंच कर गहनों के गायब होने की बात उसे बताने लगी ।

  इतनी बड़ी अनहोनी के बारे जानकर भी माँ को किसी प्रकार का कोई फर्क नही पड़ा जैसे वह पहले से ही सब कुछ जानती हो । थोड़ी देर तक तो वह बेटी से गहनों के गायब होने की बात चुपचाप सुनती रही परंतु कुछ ही देर बाद वह उसपर भड़क उठी और बोली

  "तो तुम कहना क्या चाहती हो, यही कि तुम्हारे गहने हमने रख लिए । तुम्हे पाल-पोश के इसलिए बड़ा किया था कि तुम हमे ये दिन दिखाओगी ? पहले तो भाग कर शादी की हमे कहीं मुँह दिखाने लायक नही छोड़ा । भागने से पहले क्या एकबार भी सोचा कि तुम्हारे बाद तुम्हारी दो-दो छोटी बहनों का क्या होगा ? उनसे शादी कौन करेगा ? और यह दिन दिखाने के बाद अब तुम हमे चोर बनाने चली हो निकल  जाओ इस घर से"


  मनोहर की पत्नी ने ऐसा कोई भी इल्जाम उनपर नहीं लगाया था मगर फिर भी वह माँ के गुस्से के आगे गिड़गिड़ाते हुए 

  "नहीं नहीं माँ मेरा ये मतलब बिल्कुल नहीं था मैंने ऐसा कब कहा, मैं तो बस गहनों के गायब होने की बात आपसे बता रही थी"


  मनोहर की पत्नी अपनी इन सब बातों को माँ के सामने दोहराती रही  मगर माँ ने तो जैसे उससे लड़ने की और उसे घर से निकालने की बात पहले से ही ठान रखी हो ।
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  माँ की तेज आवाजों को सुनकर धीरे-धीरे वहां सारा घर इकट्ठा हो गया । कोई मनोहर की पत्नी की बात सुनने को तैयार न था उल्टे सब उसकी माँ के सुर में सुर मिलाए जा रहे थे तभी थोड़ी देर में उसका कपड़ों से भरा बैग अचानक उसके सामने धड़ाम से आ गिरा । सामने उसकी अपनी बहन खड़ी थी । जिसकी अभी कुछ ही दिनों में शादी होनी थी और जिसके लिए वह महंगें उपहार का इंतजाम करने में लगी थी । वह बहन बाहें उठाए सामने गेट की तरफ इशारा कर रही थी । शायद यह इशारा उसे वहां से चले जाने का था । मनोहर की पत्नी को सारी बातें धीरे धीरे समझ मे आ रही थी ।

  वह समझ चुकी थी कि उसने यहां अपने कीमती गहनों को रखकर भारी भूल की थी । अब और ज्यादा देर यहां अपनी जग हसाइ कराने की बजाए उसने यहां से निकल जाना ही ठीक समझा । मनोहर की पत्नी घर से तो निकल चुकी थी । मगर अब वह जाए तो जाए कहां क्योंकि पति की इच्छा के विपरीत मायके आकर उसने पति को तो पहले ही नाराज कर दिया था और दुबारा मायके की तरफ रुख करना कहीं डूब मरने से भी ज्यादा बुरा था ।

  वह सोचने लगी कि जब मनोहर को उसे बिना बताए कीमती गहनों को  मायके में इतने दिनों से  रखे रहने एवं  मायके द्वारा ही उसे ठगे जाने की बात पता चलेगी तब उसके प्रति मनोहर का रवैया क्या होगा ? वह उसके साथ क्या करेगा ? ऐसे ही ढेरों सवाल मनोहर की पत्नी के मन में गूंज रहे थे । जिसका उसे कोई जवाब नहीं सूझ रहा था । वह इन सवालो से इतना परेशान होकर वही थोड़ी ही दूर पर एक पेड़ के नीचे बैठ गई ।


  देखते ही देखते सुबह से शाम होने को आई । परन्तु वह अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी कि उसे क्या करना चाहिए । उसकी जिंदगी एक ऐसे मझधार में आकर खड़ी हो गई थी जहां से उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था । ऐसे मे वो करे तो क्या करें ? जाए तो कहां जाए ? काफी देर सोचने के बाद अचानक वह उठ खड़ी हुई और फिर तेजी से चल पड़ी । थोड़ी ही दूर पर एक पोस्ट ऑफिस पड़ा । जहां उसने किसको एक खत लिखा और उसे बॉक्स में डालते हुए वहां से निकल गई ।

  तकरीबन एक हफ्ते बाद मनोहर को एक खत मिला । जिसको पढ़ने के बाद उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई । खत किसी और का नहीं बल्कि मनोहर की पत्नी का था । 

  जिसमें उसने अपने साथ हुए हादसे की जानकारी अपने पति को दी थी । उसने बताया था कि किस प्रकार, मनोहर द्वारा बनवाए गहनों को उसके मायके वालों ने विश्वासघात के द्वारा चुरा लिया । अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा है आगे खत में उसने अपने पति के मना किए जाने के बावजूद मायके आने के लिए माफी मांगी थी साथ ही उसने अपने मन के डर को इस खत के माध्यम से साझा किया था । जिसमें उसने लिखा था कि तब उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी जब उसे पता चलेगा कि उसके द्वारा बनवाए गए सारे गहनों को उसकी पत्नी ने ऐसे बिना बताए काफी दिनों से मायके में रख छोड़ा था और जिसे ठगी के द्वारा उसी के मायके वालों ने उससे छीन लिया खत के आखिर में मनोहर की पत्नी ने मनोहर और इस जिंदगी को सदा के लिए अलविदा लिखा था ।


  खत को पढ़ने के बाद मनोहर, पत्नी को याद करके फूट-फूटकर काफी देर तक रोता रहा । जब उसे होश आया तब वह दौड़े-दौड़े पास के थाने में गया । काफी तफ्तीश के बाद उसे पत्नी की लाश प्राप्त हुई । पत्नी को मरा हुआ देख मनोहर को पत्नी के प्रति खुद के बर्ताव एवं उसके मायके वालों द्वारा उससे की गई ठगी पर बहुत गुस्सा आया । उसने पत्नी के मायके वालों को बहुत खरी खोटी सुनाई उसने यहां तक कहा कि

  " अगर तुम सबको गहने ही चाहिए थे तो तुम लोग उसे सीधे भी मांग सकते थे अपनी ही बेटी के साथ इतना बड़ा दगा करके तुम्हें आखिर क्या हासिल हुआ"

हालांकि इसमें ढेर सारी गलतियां मनोहर को खुद भी नजर आ रही थी । पत्नी के साथ बिताए गए  इधर के कुछ महीनों में उसके संबंध पत्नी से कुछ खास अच्छे नहीं थे । शायद जिसके कारण उनका एक दूसरे के प्रति विश्वास लगभग खत्म हो चुका था पत्नी के मायके आने पर मनोहर ने उससे कभी भूलकर भी बातचीत नहीं की और ना ही कभी उसका फोन उठाया । शायद पति के प्रेम पर अविश्वास के नाते हैं उसकी पत्नी ने यह कदम उठाया अन्यथा वह शायद ऐसी गलती कभी नहीं करती ।

मनोहर को समझ आने लगा कि उसे पत्नी के साथ कम्युनिकेशन बनाए रखना चाहिए था यदि उसने अपनी पत्नी  को अपनेपन का एहसास कराता रहा होता तो आज यह नौबत शायद नहीं आती क्योंकि तब वह उस मुश्किल की घड़ी मे उस पर विश्वास करके अपने साथ हुए हादसे की जानकारी  उससे  जरूर शेयर करती और तब शायद दोनो मिलजुल कर इस समस्या का कोई न कोई हल जरूर ढूंढ लेते उसे इस बात का कोई भय नहीं होता कि जब पति को गहने गायब होने की बात पता चलेगी तो उस समय उसका क्या प्रतिक्रिया रहेगी ।


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इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है | Moral Of This Inspirational Hindi Story



इस कहानी से हमें दो शिक्षा मिलती है 

हर शिकवे गिले को भूल कर हम अपनों से जितना ज्यादा हो सके उनके करीब रहने की कोशिश करें उनसे कम्युनिकेशन बनाए रखें ताकि कोई भी मुसीबत की घड़ी में वे हमसे अपनी हर बात शेयर करें और उन्हें बड़ी से बड़ी दुर्घटनाओं से बचाया जा सके !


हमें हद से ज्यादा किसी पर भी विश्वास करने की जरूरत नहीं है साथ ही हमें अपनों के इरादों को भी ठीक से पहचानने की जरूरत है !


  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी बातों को लेकर लोग आपस में कलह पैदा कर लेते हैं उनमें महीनो-महीनों तक आपस मे बातचीत नहीं होती हालांकि ऐसा नहीं है कि उनके बीच पहले से प्यार कुछ कम हो गया है असल मे एक अजीब तरह का हठ, हमारे ऊपर हावी हो जाता है जिसके कारण हम हमारे अपनों से दूर दूर रहने की कोशिश करने लगते हैं कई बार यह दूरी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है इस कहानी में हमने देखा कि मनोहर और उसकी पत्नी के रिश्ते काफी लंबे समय से तीखे चले आ रहे थे जिसके कारण वे एक दूसरे से कोई भी बात शेयर नहीं कर रहे थे वे एक दूसरे के प्रति ऐसे बन गए थे मानो वे पति-पत्नी ना होकर एक दूसरे के जानी दुश्मन हो ।
  मनोहर का बेवजह उसे मायके जाने से रोकना उसके और उसकी पत्नी के बीच प्रेम संबंधों को धीरे धीरे कटुता में बदलता गया वे एक दूसरे को अपना दुश्मन समझ बैठें । उनके बीच कम्युनिकेशन बिल्कुल शून्य हो गया था । उनके बीच दुश्मनों जैसा रिश्ता बन चुका था ऐसे में अपने ही माता-पिता द्वारा ठगे जाने की बात को मनोहर से इस ठगी की बातें शेयर करें तो कैसे करें जिसके कारण असहाय मनोहर की पत्नी ने पूरी दुनिया में खुद को अकेला पाते हुए इस दुनिया को अलविदा कहना ही बेहतर समझा ।
  आजकल की मॉडर्न युग में रिश्तों मे विश्वास की डोर  ( faith on relationship ) दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है ये बात चाहे पति-पत्नी के बीच की हो चाहे, बाप-बेटे के बीच की हो, या चाहे दोस्तों के बीच की हो, रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है । आजकल स्कूलों में बच्चों का बात-बात पर सुसाइड की कर लेना, एक आम बात हो चुकी है इसके लिए सिर्फ स्कूलों को ही कसूरवार ठहराना गलत है । 
  इसमे स्कूल बहुत हद तक जिम्मेदार तो हैं ही मगर उनके साथ-साथ कुछ कसूर हमारा भी है । हम कभी भी अपने बच्चों से एक दोस्ताना रिश्ता बनाने की नहीं सोचते हम अपने काम में इतने व्यस्त हैं, हमें पैसा कमाने की इतनी जल्दी है कि हम अपने मूल कर्तव्य को ही ignore करते जाएंगे रहे हैं हम शायद ये भूल चुके हैं कि हमें अपने बच्चों के साथ भी वक्त गुजारना चाहिए उनसे घुलने-मिलने की कोशिश करनी चाहिए उनके साथ एक friendly relationship कायम करना चाहिए ताकि वे अपनी बातों को हमसे शेयर कर सकें । अपनी छोटी-छोटी परेशानियों को भी हमसे खुलकर बता सके । 
  गलती किससे नहीं होती है मगर जब हम उन गलतियों पर को अपनों से बताने से डरने लगते हैं तब कभी-कभी ये गलतियां एक दुर्घटना का कारण बन जाती है पति पत्नी के बीच भी ऐसी तमाम बातें हैं जो वे अगर एक-दूसरे से शेयर करें तो मिल बैठकर उस समस्या का हल निकाला जा सकता है मगर जब रिश्तो में मिठास से ज्यादा खटास आ जाती है जैसा कि इस Hindi Story मे हमने देखा,  तब कोई भी बात एक दूसरे से शेयर कर पाना बहुत कठिन हो जाता है ।
  जब घर का माहौल हर वक्त कलह से भरा होता है तब हर कोई अपनी बात को कहने के लिए सही मौके का इंतजार करता है कभी कभी उसमें काफी वक्त लग जाता है और गाड़ी हाथ से निकल जाती है इसीलिए बेहतर होगा कि

हम छोटी-छोटी नाराजगी को रिश्तो के बीच खटास की वजह न बनने दें जिससे हमारे अपने हमसे अपनी छोटी से छोटी परेशानी शेयर करने से न घबराए जिससे वक्त रहते हर समस्या का मिलजुल कर कोई हल निकाला जा सके और इन बड़ी दुर्घटनाओ से बचा जा सके !


      Writer 
  Karan "GirijaNandan"
      With  
 Team MyNiceLine.com

           


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