हाथी और शेर की प्रेरणादायक कहानी | क्रोध पर नियंत्रण कहानी| क्रोध से हानि, क्रोध का दुष्परिणाम, क्रोध का फल| lion and elephant short motivational story in hindi

क्रोध पर नियंत्रण कहानी | Control On Anger Motivational Story In Hindi


  एक जंगल में ढेर सारे जानवर रहा करते थे । जंगल के सभी जानवर आपस में मिलजुल कर रहा करते थे । उनमें काफी प्रेम था । सर्दियों का मौसम आया कड़ाके की ठंड ने सभी जानवरों को अपने-अपने घरों में सिकुड़ कर रहने के लिए मजबूर कर दिया परंतु जैसे हर रात के बाद सुबह आती है वैसे ही ठंड के बाद बसंत का मौसम आया ।

  बसंत का यह सुनहरा मौसम जंगल के सभी जानवरों को बहुत भाया । ऐसे सुंदर मौसम का लुफ्त उठाने के लिए सभी जानवर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और एक दूसरे के साथ हंसी-ठिठोली करने लगे । अपने मजे को दोगुना करने के लिए सभी जानवरों ने कोई खेल खेलने की सोची ।

  उनके बीच खेले जा रहे कई खेलों के बीच एक दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ । इस दौड़ प्रतियोगिता में जंगल के सभी जानवरों ने भाग लिया । वे सभी काफी जी जान से दौड़े और सफल होने के लिए सारे जानवरों ने अपनी जान लगा दी परंतु कोशिश चाहे जितनी भी  कर ली जाए जीत का सेहरा हर किसी के सर नही बध सकता क्योंकि विजेता तो कोई एक ही होता है ।

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   कुछ ही क्षणो मे प्रतियोगिता का समापन हो गया और अब बारी थी विजयी प्रतिभागियों को इनाम देने की । जब जंगल के राजा शेर द्वारा दौड़ में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आए प्रतिभागियों को इनाम दिया जा रहा था तभी नटखट बंदर ने शेर से कहा 

 "शेर राजा, शेर राजा आप तो मोटा भाई को भूल ही गए । आखिर वो भी तो इनाम के हकदार हैं । .. चलो शुरू से ना सही परन्तु आखिरी से प्रथम स्थान तो उन्होने ही प्राप्त किया है ना.. फिर भला हम उन्हे कैसे भूल सकते हैं"

  शेर ने कहा 
 "अरे ये मोटा भाई कौन है पहले तो यह नाम मैंने कभी नहीं सुना"
 "अपने अप्पू भाई और कौन"
  (नटखट बंदर ने कहा)

  यह सुनते ही वहां मौजूद सभी जानवर जोर-जोर से ठहाके मारकर हंसने लगे और सामने खड़े हाथी को मोटा भाई, मोटा भाई कहकर चिढ़ाने लगे ।
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  वैसे तो हाथी को प्रतियोगिता मे सबसे आखरी नंबर पर आने का कोई खेद नहीं था परंतु बंदर द्वारा उसकी हंसी उड़ाए जाने और उसे मोटा भाई कहे जाने पर उसे बहुत गुस्सा आया । 

  वह चुपचाप वहां से चला गया परंतु प्रतियोगिता में मिली हार के बाद नटखट बंदर द्वारा हाथी पर लगाया गये मोटा भाई का टैग, अब हटने से रहा । अब तो आए दिन जंगल के सारे जानवर उसे मोटा भाई, मोटा भाई  कहकर के चिढ़ाते ।

  देखते ही देखते हाथी के सब्र का बांध टूट गया और वह जंगल के सभी जानवर पर पागलो की तरह टूट पड़ा । सारे जानवर भयभीत हो कर इधर-उधर भागने लगे परन्तु जो भी जानवर क्रोधित हाथी के सामने पड़ा उसने उसे या तो अपने पैरों के नीचे कुचल डाला या फिर उसे जमीन पर पटक-पटक कर मार डाला । हमारी लेटेस्ट (नई) कहानियों को, Email मे प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें. It's Free !

  जब इस बात की सूचना जंगल के राजा शेर को मिली तब वह दौड़े दौड़े हाथी के पास पहुचा और उसे समझाने का प्रयास करने लगा । उसने उसे शांत होने की गुजारिश की परंतु आग बबूला हाथी ने शेर की भी एक न सुनी नतीजतन देखते ही देखते शेर और हाथी में जंग छिड़ गई हालांकि इस जग में हाथी बहुत घायल हुआ ।

  परन्तु हाथी का गुस्सा शेर पर भारी पड़ा और आखिरकार हाथी ने शेर को पहले अपने सूड़ से जमीन पर पटका और फिर उसे अपने पैरो से कुचल कर मौत के घाट उतार दिया । 

  इस प्रकार पूरा जंगल जानवरों से वीरान हो गया परिणामस्वरूप इतने विशाल  और घने जंगल में सिर्फ एक ही जानवर शेष रह गया और वह था हाथी ।
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  इसप्रकार हाथी ने बड़े सुकून की सांस ली क्योंकि अब उसे यहां मोटा भाई, मोटा भाई कहकर तंग करने वाला कोई न था । हाथी मस्तमौला होकर पूरे जंगल में विचरण करता और नदी का मीठा पानी पीता ।

  धीरे-धीरे काफी दिन गुजर गए । अब तो ना सिर्फ हाथी का गुस्सा शांत हो चुका था बल्कि अब तो उसे जंगल के अन्य जानवरों द्वारा खुद को चिढ़ाए जाने वाली बात भी याद नहीं रही ।

  एक दिन हाथी की तबीयत थोड़ी  नासाज हुई । जिसके कारण वह अपने लिए चारा ढूंढने नहीं जा सका । इतना ही नहीं उसे थोड़ी दवा की भी जरूरत थी परंतु उसने अपने चारों तरफ सर घुमा कर देखा मगर वहां कोई नहीं था जो उसके लिए थोड़ा चारा और कुछ जड़ी बूटियों का प्रबंध कर सके । जिससे उसकी तबीयत ठीक हो जाए ।

  ऐसी हालत में आज उसे पहली बार अपने दोस्त की याद आई । वह उन्हें काफी मिस करने लगा ।

  कभी जिनमे उसे सिर्फ बुराइयाँ ही बुराइयाँ दिखने लगी थीं आज उनकी अच्छाइयां भी उसे याद आयीं वह उनके साथ गुजारे पलो को याद करने लगा वो याद करने लगा कि कैसे वे सब साथ रहा करते थे, एक दूसरे के साथ खेला करते थे और कैसे एक दूसरे के सुख-दुख में एक-दूसरे का ख्याल रखा करते थे परंतु एक पल के गुस्से ने सब कुछ कैसे खत्म करके रख दिया । उसके प्यारे दोस्त उसे हमेशा-हमेशा के अलविदा कह चुके थे ।

कहानी से शिक्षा | Moral Of This Best Inspirational Story In Hindi


इस कहानी से हमें निम्न शिक्षा मिलती है :-

अपनों के अपनेपन का एहसास अक्सर हमें तब होता है जब हम उनसे बिछड़ जाते हैं !

अपनों की छोटी बड़ी  गलतियों को भूल कर उनसे रिश्ता कायम रखना ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए क्योंकि यह संसार अपनों के बिना भी जिया जा सकता है परंतु अपने के साथ जीने में जो मजा है वो अकेले जीने में नहीं !

जैसे एक अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता वैसे ही सभी काम हम अकेले पूरा नहीं कर सकते इसके लिए हमें औरों की भी जरूरत होती है । इसीलिए हमें मिलजुल कर एक दूसरे के साथ रहना चाहिए !

किसी की कमियों पर हंसना या तंज कसना मूर्खता है !

क्रोध एवं आवेश में लिया गया फैसला बाद में पछताने के लिए मजबूर कर देता है !

                             



   Writer
  Karan "GirijaNandan"
 With  
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